फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनोहर-मान की बैठक कल: हरियाणा सीएम बोले- SYL पर हमारा हक, पानी न मिलने से धरती प्यासी

Thu, 13 Oct 2022 05:37 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि पानी न मिलने की वजह से हरियाणा को हर वर्ष 42 लाख टन खाद्यान्नों की हानि उठानी पड़ती है। अगर 1981 के समझौते के अनुसार 1983 में एसवाईएल का निर्माण हो जाता तो हरियाणा 130 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्नों व दूसरे अनाजों का उत्पादन करता।  
विज्ञापन
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर 14 अक्तूबर को हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री की बैठक होगी। सुबह साढ़े 11 बजे होने वाली इस बैठक में मामले के समाधान के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मौजूद रहेंगे। 

विज्ञापन


बैठक से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि एसवाईएल पर हरियाणावासियों का हक है और उन्हें पूरी आशा है कि उनका यह हक अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लिए एसवाईएल का पानी अत्यंत आवश्यक है। अब इस मामले में एक टाइमलाइन तय होना जरूरी है, ताकि प्रदेश के किसानों को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि शुक्रवार को होने वाली इस अहम बैठक से कोई हल जरूर निकलेगा।

सीएम ने कहा कि सबको मालूम है कि सर्वोच्च न्यायालय के दो फैसलों के बावजूद पंजाब ने एसवाईएल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को लागू करने के बजाय पंजाब ने वर्ष 2004 में समझौते निरस्तीकरण अधिनियम बनाकर क्रियान्वयन में रोड़ा अटकाने का प्रयास किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

गौरतलब है कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधान के अंतर्गत 24 मार्च 1976 के भारत सरकार के आदेश के अनुसार हरियाणा को रावी-ब्यास के फालतू पानी में से 3.5 एमएएफ जल का आवंटन किया गया था। एसवाईएल नहर का निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से हरियाणा केवल 1.62 एमएएफ पानी का इस्तेमाल कर रहा है। पंजाब अपने क्षेत्र में एसवाईएल नहर का निर्माण कार्य पूरा न करके हरियाणा के हिस्से के लगभग 1.9 एमएएफ जल का गैर-कानूनी ढंग से उपयोग कर रहा है

पंजाब के इस रवैये के कारण हरियाणा अपने हिस्से का 1.88 एमएएफ पानी नहीं ले पा रहा है। पंजाब और राजस्थान हर वर्ष हरियाणा के लगभग 2600 क्यूसिक पानी का प्रयोग कर रहे हैं। अगर यह पानी हरियाणा में आता तो 10.08 लाख एकड़ भूमि सिंचित होती। प्रदेश की प्यास बुझती और लाखों किसानों को इसका लाभ मिलता। इस पानी के न मिलने से दक्षिणी-हरियाणा में भूजल भी काफी नीचे जा रहा है। 

एसवाईएल के न बनने से हरियाणा के किसान महंगे डीजल का इस्तेमाल कर और बिजली से नलकूप चलाकर सिंचाई करते हैं, जिससे उन्हें हर वर्ष 100 करोड़ रुपये से लेकर 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है। पंजाब क्षेत्र में एसवाईएल के न बनने से हरियाणा में 10 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचित करने के लिए सृजित सिंचाई क्षमता बेकार पड़ी है। इसकी वजह से हरियाणा को हर वर्ष 42 लाख टन खाद्यान्नों की भी हानि उठानी पड़ती है। अगर 1981 के समझौते के अनुसार 1983 में एसवाईएल का निर्माण हो जाता तो हरियाणा 130 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्नों व दूसरे अनाजों का उत्पादन करता। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें