हरियाणा के कृषि विभाग ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल को रोकने के लिए नैनो यूरिया के छिड़काव की योजना बनाई है। इसके तहत विभाग ड्रोन व अन्य संसाधनों से नैनो-यूरिया का छिड़काव करवाएगा।
पहले चरण में कृषि विभाग ने एक लाख एकड़ एरिया पर नैनो यूरिया का छिड़काव के प्रदर्शन का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 100 रुपये खर्च करने होंगे, जबकि छिड़काव व अन्य खर्च विभाग वहन करेगा। इस समय गेहूं की बिजाई चल रही है। इसलिए इसका इस्तेमाल गेहूं के साथ सरसों की फसल पर किया जाएगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डा. मंजीत नैन ने बताया कि पहली बार एक लाख एकड़ फसल पर नैनो यूरिया के छिड़काव किया जा रहा है। सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। अगले दो से तीन दिन में इसकी एक मानक संचालक प्रक्रिया (एसओपी) बनाकर सभी जिलों में भेज दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस जिले में ड्रोन की उपलब्धता होगी, वहां ड्रोन से इसका छिड़काव किया जाएगा। जहां ड्रोन नहीं होगा, वहां ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रे का इस्तेमाल किया जाएगा।
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जहां ड्रोन उपलब्ध नहीं होगा वहां दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल
दरअसल अभी तक सिर्फ 22 ही किसान ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग ले पाए हैं। विभाग ने 500 किसानों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा है। इसलिए जहां ड्रोन उपलब्ध नहीं होगा, वहां फिलहाल दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन एक दिन में दस एकड़ फसल का छिड़काव कर सकेगा। ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव फसलों पर अधिक प्रभावी है और इससे उत्पादकता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं और सरसों पर जब किसान यूरिया डालते हैं तो काफी हिस्सा गैस बनकर हवा में उड़ जाता है, जबकि पानी का अधिक इस्तेमाल होने पर वह फसलों के जड़ में चला जाता है। इससे पौधों को फायदा नहीं मिलता। वहीं, फसलों पर अत्यधिक इस्तेमाल से इसका स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। वहीं, नैनो यूरिया जो एक तरल उर्वरक है वह पत्तियों के सहारे सीधे पौधे में प्रवेश कर जाता है और पौधे की जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन को रिलीज करता है।
सब्सिडी की बचत होगी
दरअसल रासायनिक उर्वरकों पर सरकार भारी सब्सिडी देती है। किसानों को यूरिया की 45 किलो की बोरी 266 रुपये में मिलती है। एक बोरी पर सरकार की ओर से 1500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इस वजह से किसानों को सस्ती यूरिया मिलती है। वहीं, नैनो यूरिया की एक बोतल 220 रुपये में आती है। इसमें सरकार कोई सब्सिडी नहीं देती। लागत के हिसाब से किसानों को ज्यादा फायदा नहीं है, मगर नैनो यूरिया के इस्तेमाल से किसानों का समय बचता है और रासायनिक उर्वरक का अत्यधिक इस्तेमाल से बचाव होता है।