इसका रखें ध्यान
- आंखों में जलन होने पर रगड़ना नहीं चाहिए क्योंकि प्रदूषण में मौजूद कण रगड़ने की वजह से आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं
- आंख में जलन या लालिमा होने पर खुद से किसी भी तरह के आई ड्राप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
- गंभीर स्थिति में प्रदूषण के पहुंचने पर आपको आंखों की रक्षा के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए
- ज्यादा प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए
स्मॉग में सांस लेना मुश्किल
धुआंसा (स्मॉग) दो शब्दों धुआं (स्मोक) और कोहरे (फॉग) से मिलकर बना है जिसकी वजह से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह एक पीला या काला कोहरा होता है जो वायु प्रदूषण के एक मिश्रण से बना है, जिसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर आक्साइड आदि गैसें होती है ।
स्मॉग में ये खतरनाक तत्व होते हैं शामिल
वाहन के धुएं, निर्माण कार्य की धूल, खुले में जलने वाले कूड़े का धुआं, इनसीनेरेटरर्स, कारखाने, लॉन परिवाहक, कोयला आधारित बिजली उत्पादन स्टेशन से निकलने वाला जहरीला धुआं, डीजल और पेट्रोल वाहन, सॉल्वेंट्स, क्लीनर और तेल पेंट, कीटनाशकों और प्रदूषक से मिलकर स्मॉग बनता है।
ये भी खतरे की चपेट में
- बच्चों के फेफड़े विकास कर रहे हैं और ज्यादा समय बाहर खेलने में बिताते हैं ऐसे में उनमें सांस लेने के दौरान अधिक प्रदूषण से प्रभावित होने का खतरा रहता है।
- अस्थमा की समस्या से ग्रस्त लोगों को
- हृदयरोग व मधुमेह के रोगियों को भी
- बुजुर्गों को उच्च जोखिम न केवल अपनी उम्र की वजह से है बल्कि उनके कमजोर दिल, फेफड़े और प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण भी हैं
- एलर्जी से प्रभावित लोग, गर्भवती महिलाओं और धूम्रपान करने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है