एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के जनरल हाउस की बैठक आठ नवंबर को हो रही है। इसमें एसजीपीसी के अध्यक्ष के लिए जरनल हाउस उम्मीदवार तय करेगा। वहीं कार्यकारिणी व पदाधिकारियों की भी चर्चा होगी। एसजीपीसी में जो मौजूदा हालात हैं, संभावना है कि एसजीपीसी के मौजूदा अध्यक्ष हरजिंदर धामी को दोबारा एसजीपीसी के अध्यक्ष के तौर पर एक साल के लिए चुना जाएगा।
अध्यक्ष पद के लिए बीबी जागीर कौर, एसजीपीसी के मौजूदा महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल और भाई मंजीत सिंह भी जोर लगा रहे हैं। परंतु अकाली दल के नेतृत्व का झुकाव अभी तक धामी की तरफ ही है। धामी शांत मानसिकता और राजनीतिक रूप में लचीलापन रखते हैं, जो अकाली दल बादल में पूरी तरफ फिट बैठते हैं। आने वाले दिनों में एसजीपीसी के चुनाव भी हैं, जिसके वोट बनाने की प्रक्रिया 27 अक्तूबर से शुरू हो चुकी है।
इन हालात में अकाली दल बादल धामी की जगह किसी और व्यक्ति को एसजीपीसी का अध्यक्ष बनाकर कोई भी राजनीतिज्ञ रिस्क नहीं लेना चाहता है। अकाली दल अगर किसी नए चेहरे को अध्यक्ष बनाता है तो उसे पहले तो अपने कामकाज को समझने में ही चार माह लग जाएंगे। फिर चुनावों का भी सामना करना नए व्यक्ति के लिए एक चुनौती होगा। धामी कानूनी विशेषज्ञ हैं और प्रबंधकीय काम को गहराई से समझते हैं। इसलिए अकाली दल धामी की जगह किसी ओर को अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के पक्ष में नहीं है।
बीबी जगीर कौर ने चाहे पिछली बार बागी होकर चुनाव लड़ा था, परंतु उनको वर्करों की जमीर की आवाज के नारे के बावजूद 42 वोट से ही संतुष्टि होना पड़ा था। इस बार बीबी जगीर कौर चुनाव लड़ने के मूड में भी नहीं दिखाई दे रही हैं। इस वक्त ढींडसा ग्रुप भी पूरी तरह एसजीपीसी के आने वाले चुनावों पर फोकस कर रहा है। अध्यक्ष पद की लड़ाई में उलझकर ढींडस ग्रुप अपने आप को कमजोर साबित करने की कोशिश नहीं करेगा। जबकि अध्यक्ष पद के लिए अन्य दावेदार इस बार दोबारा कार्यकारिणी में पहले से बढि़या पद हासिल कर संतुष्ट रहने की भी उम्मीद है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की ओर से भी जो एसजीपीसी के सदस्यों से बातचीत की गई है, उससे यह राय सामने आई है कि एसजीपीसी के ज्यादातर सदस्य धामी को ही दोबारा अध्यक्ष चाहते हैं।