दिन में मां के साथ छलियां बेचती है। रात को सड़क किनारे बैठकर ही मोबाइल की रोशनी में पढ़ाई करती है। जानिए कौन है ये बहादुर बेटी। हम बात कर रहे हैं मोहाली के लालड़ू की रहने वाली 14 वर्षीय किरण की।
एक गरीब रेहड़ी चालक की बेटी भी शिक्षा के सहारे अपने और परिवार के सपने को साकार करने में जुटी है। दरअसल, रेहड़ी वाले की बेटी अपनी मां के साथ सड़क किनारे छल्लियां (मक्के के भुट्टे) बेचते हुए खाली समय में मोबाइल की रोशनी में पढ़ाई करती है।
दप्पर कॉलोनी के गरीब परिवार की इस बेटी का सपना डॉक्टर बन लोगों की सेवा करना है। सड़क के किनारे बैठकर इस प्रकार पढ़ाई करने के जज्बे को यहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति सराह रहा है। किरण अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी है जो सरकारी स्कूल दप्पर में 9वीं कक्षा की छात्रा है।