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Chandigarh News: सीएलयू और इंडस्ट्री कन्वर्जन पर फिलहाल ब्रेक, 1.25 लाख संपत्तियों व 2500 उद्योगपतियों की उम्मीदों को झटका

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ के गांवों में चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) लागू करने और औद्योगिक प्लॉटों को व्यावसायिक उपयोग में बदलने की वर्षों पुरानी मांगों पर फिलहाल विराम लग गया है। यूटी प्रशासन ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि मास्टर प्लान-2031, पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट-1952, सीमित भूमि और बुनियादी ढांचे पर बढ़ने वाले दबाव के कारण मौजूदा परिस्थितियों में दोनों प्रस्तावों को लागू करना संभव नहीं है। प्रशासन के इस रुख से गांवों की करीब 1.25 लाख संपत्तियों के मालिकों और औद्योगिक क्षेत्र के करीब 2500 प्लॉट धारकों एवं उद्योगपतियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में इन दोनों मांगों को प्रशासन के सुधार एजेंडे में भी शामिल नहीं किया गया है।
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प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार दोनों प्रस्तावों पर विस्तार से विचार किया गया लेकिन निष्कर्ष निकला कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों और शहर की भौगोलिक सीमाओं के बीच इन्हें लागू करना न तो व्यावहारिक है और न ही नियोजित विकास की अवधारणा के अनुरूप। ऐसे में फिलहाल इन पर आगे बढ़ना संभव नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ के 22 से 23 गांवों के आबादी क्षेत्र और पेरिफेरी एरिया पेरिफेरी कंट्रोल एक्ट-1952 तथा मास्टर प्लान-2031 के दायरे में आते हैं। इन कानूनों के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन पर प्रतिबंध है। इसके अलावा गांवों में जमीन छोटे और बिखरे हुए भूखंडों में होने के कारण सड़क, सीवरेज, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर भारी खर्च आएगा। प्रशासन का मानना है कि बड़े स्तर पर सीएलयू लागू करने से ट्रैफिक और पार्किंग का दबाव भी बढ़ेगा। हालांकि प्रशासन ने नियमों में संशोधन के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी मांगी है।
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औद्योगिक प्लॉटों के व्यावसायिक उपयोग की मांग पर भी प्रशासन ने फिलहाल राहत नहीं दी है। औद्योगिक क्षेत्र के कई प्लॉटों में वर्तमान में खुदरा दुकानें संचालित हो रही हैं जबकि मास्टर प्लान इसकी अनुमति नहीं देता। एस्टेट कार्यालय ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस भी जारी कर चुका है। वर्ष 2005 में विशेष नीति के तहत फेज-1 और फेज-2 के करीब 140 औद्योगिक प्लॉटों को सीमित व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई थी, लेकिन मास्टर प्लान-2031 में साफ किया गया है कि यह नीति दोबारा लागू नहीं होगी और औद्योगिक क्षेत्रों का मूल स्वरूप बरकरार रखा जाएगा।
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय की टास्क फोर्स के साथ हुई बैठक में उद्योगपतियों ने एफएआर बढ़ाने के साथ कन्वर्जन की मांग भी उठाई थी। एफएआर को लेकर प्रशासन ने कदम बढ़ाए हैं, लेकिन कन्वर्जन के मुद्दे पर अभी सहमति नहीं बनी है।
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