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Chandigarh News: गुरु नानक देव विवि में पंजाबी को शोध भाषा बनाने का ऐतिहासिक फैसला

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संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। शिरोमणि लेखक बोर्ड पंजाब ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर की ओर से अंग्रेजी के साथ-साथ पंजाबी (गुरमुखी) को भी शोध की भाषा के रूप में अपनाने के निर्णय का जोरदार स्वागत किया है। इसे पंजाबी भाषा, साहित्य और अकादमिक भविष्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया गया। इस संबंध में कैरियर कॉलेज के कार्यालय में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी के दौरान बोर्ड के प्रधान प्रभ किरण सिंह की अध्यक्षता में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
गोष्ठी में उपस्थित गीतकारों, कवियों और कथाकारों ने कहा कि यह निर्णय मातृभाषा में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। बोर्ड के प्रधान प्रभ किरण सिंह ने कहा कि माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने पंजाबी-प्रथम शिक्षा, शोध एवं प्रशासन नीति 2026 को मंजूरी देकर नई मिसाल कायम की है। इस नीति के तहत अब विश्वविद्यालय में पीएचडी थीसिस, निबंध, परियोजना रिपोर्ट और शोध कार्य अंग्रेज़ी के साथ-साथ पंजाबी (गुरमुखी) में भी जमा किए जा सकेंगे।
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साहित्यिक प्रस्तुतियों से सजी गोष्ठी
कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात लेखक पम्मी हबीब ने अपनी लघुकथा झोली फल से की जिसमें डेरावाद में व्याप्त पाखंड को संवेदनशील ढंग से उजागर किया गया। बोर्ड के महासचिव एवं गोष्ठी संचालक गीतकार परमिंदर सिंह अलबेला ने कुदरत दी मार गीत प्रस्तुत किया। गीतकार सुखबीर संधे ने हास्य-व्यंग्य रचना टेंशन से श्रोताओं को गुदगुदाया जबकि वरिष्ठ कवि एडवोकेट दीप लुधियानवी ने कविता तूं हस्सिया कर सुनाई। पंथक कवियों हरदेव सिंह कलसी और चरणजीत सिंह चन्न ने संत रविदास जी के जन्मदिवस को समर्पित रचनाएं पेश कीं। ग़ज़लगो ज़ोरावर सिंह पंछी की तरन्नुम में गाई गई गजल चिड़ियां दी डार विशेष आकर्षण रही। अंत में प्रभ किरण सिंह ने अपने स्वर्गीय दादा कामिल जिहलमी की गुरबाणी आधारित कविता का पाठ कर सभी साहित्यकारों का आभार जताया। कार्यक्रम की व्यवस्था तूफान साहिब मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी ने की।
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