भारतीय पुरुष टीम के गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू और महिला टीम की मिडफील्डर संजू 2019-20 सत्र के लिए साल के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर बने। रतनबाला देवी को महिला और अनिरुद्ध थापा को पुरुष वर्ग में ‘एमर्जिंग फुटबॉलर ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार दिया गया। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने शुक्रवार को यह घोषणा की।
गुरप्रीत का यह पहला पुरस्कार है। वह एआईएफएफ के ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ बनने वाले दूसरे और शहर के पहले गोलकीपर हैं। उनसे पहले सुब्रत पॉल ने 2009 में यह पुरस्कार जीता था। गुरप्रीत को इंडियन सुपर लीग और आई लीग क्लब कोचों के मतों के आधार पर विजेता चुना गया। 28 वर्षीय गुरप्रीत को पिछले साल अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा गया था। गुरप्रीत सिंह संधू ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन का शुक्रिया करते कहा कि मैं फेडरेशन के विश्वास पर खरा उतरा। यह अवार्ड इसका ही नतीजा है।
परिवार में खुशी का माहौल
गुरप्रीत सिंह सधू की मां हरजीत कौर चंडीगढ़ पुलिस में डीएसपी हैं, जबकि उनके पिता तेजिंदर सिंह पंजाब के खन्ना में एसपी के पद पर तैनात हैं। बेटे को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवार्ड मिलने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। हरजीत कौर ने बताया कि उनका बेटा अभी बंगलूरू में है। घर लौटने पर परिवार सहित खुशी मनाई जाएगी।
गोल्डन ग्लव्स अवार्ड जीत चुके हैं संधू
साल 2019 में गुरप्रीत सिंह संधू को गोलकीपर के रूप में विरोधी टीमों के गोल बचाने के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की ओर से गोल्डन ग्लव्स का अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा इंडियन सुपर लीग सीजन 2019-20 में बेस्ट गोलकीपर का अवार्ड जीत चुके हैं। गोल रोकने में माहिर गुरप्रीत सिंह संधू को ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है।
शहर से शुरू हुआ फुटबॉल का सफर
गुरप्रीत सिंह संधू मूलरूप से मोहाली के रहने वाले हैं। 8 साल की उम्र से फुटबाल खेल रहे हैं। सेक्टर-45 स्थित सेंट स्टीफेंस फुटबॉल अकादमी के ट्रेनी हैं। यहीं पर कोच गुरप्रीत सिंह और ट्रेनर सुरिंदर सिंह से फुटबॉल की एबीसीडी सीखी। यहीं स्कूल की टीम के कप्तान, स्टेट चैंपियन और नेशनल के बाद अब इंटरनेशनल स्तर पर धाक जमाई।