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75 जानें बचाने वाले नानक चंद ने ऐसे दिखाई बहादुरी

Wed, 29 Jul 2015 04:11 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, दीनानगर(गुरदासपुर)
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पंजाब के गुरदासपुर में देश को हिलाने वाले आतंकी हमले में 75 जिंदगियां बचाने वाले नानक चंद के घर बधाई देने वालों का तांता लगा है। सवारियों के परिवार वाले मिलकर इनाम के साथ बधाई भी दे रहे हैं।
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नानक चंद को सबसे बड़ा इनाम उनके बच्चों ने दिया। उन्होंने कहा कि ‘वी आर वैरी प्राउड ऑफ यू पापा। भावुक नानक चंद ने कहा कि यही मेरा सबसे बड़ा इनाम है।

नानकचंद ने बच्चों के सामने बहादुरी का सच खोला। रोज सुबह 3.45 पर पठानकोट से चंडीगढ़ रोडवेज बस ले जाने वाले ड्राइवर नानक चंद ने बताया कि सुबह 3.45 पर बस लेकर वह पठानकोट के नरोट जैमल से निकला था। सोमवार को कामकाज का दिन होता है, इसलिए बस में ज्यादा लोग थे।

कंडक्टर वरिंदर टिकट काट रहा था। बस थाने के बाहर पहुंची तो देखा कि आगे पुलिस के बैरिकेड लगे हुए थे। बैरिकेड पर सेना की वर्दी में एक व्यक्ति हाथ में एके-47 लिए खड़ा था। उसने उसे रुकने का इशारा किया। उसे शक हो गया।
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बैरिकेड पर खड़ा व्यक्ति सेना की वर्दी में था, लेकिन उसका मुंह बंधा हुआ था। पास ही पुलिस की कोई गाड़ी भी नहीं थी, सेना का भी वाहन नहीं दिखा। उसे लगा कि कुछ गड़बड़ है।
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ऐसे बचाई 75 जिंदगियां

इसके बाद नानकचंद ने बैरिकेड से तेजी से बस को घुमाया। आतंकी को लगा कि वह उसे कुचलने वाला है तो उसने बस पर फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली तो ठीक उसकी सीट के ऊपर से निकलकर खिड़की से बाहर निकल गई। वरिंदर चिल्लाया बस भगाओ, फायरिंग होने लगी है।

उसे सवारियों की चिंता थी कि कहीं आतंकवादी बस में न आ जाएं या उनकी फायरिंग से किसी की जान न चली जाए। उसने जिग-जैग तकनीक का इस्तेमाल कर बस के स्टेयरिंग को कभी दाएं तो कभी बाएं घुमाना शुरू कर दिया ताकि अगर आतंकी फायर करें तो उनका निशाना चूक जाए।

उन्होंने आतंकी के पास कार देखी थी, जिससे यह भी चिंता थी कि कहीं वह पीछा न करें। इसलिए बस को तेजी से भगा लिया। दो सवारियों की बाजू पर गोली लगी थी, उनके खून बह रहा था। बस में कुछ पुलिस वाले भी थे, उनको भी बोला गया कि आला अधिकारियों की इसकी जानकारी दे दें। नानक कहते हैं कि वह बस को सीधा गुरदासपुर सिविल अस्पताल ले आए, जहां पर घायलों को दाखिल करवाया।

आतंकियों को सामने देखकर न घबराने के सवाल पर नानक चंद ने कहा कि हमें ट्रेनिंग ऐसी दी गई है कि बस का ब्रेक भी फेल हो जाए तो हाथ नहीं कांपने चाहिए और सवारियों को बताना भी नहीं चाहिए। अपना फर्ज इमानदारी से निभाना चाहिए, इसका फल तो मिलता ही है।
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