गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव का परिणाम रविवार को घोषित किया जाएगा। सुबह आठ बजे वोट की गिनती शुरू होगी और करीब बारह बजे गुरदासपुर लोकसभा हलके की जनता का फैसला सबके सामने होगा। उपचुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की ओर से किये जा रहे दावों और लगाई गई उम्मीदों पर भी विराम लग जाएगा।
सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद 11 अक्तूबर को उपचुनाव हुआ था। मतदान के बाद जिले के तीनों विधानसभा हलकों सुजानपुर, भोआ और पठानकोट के लिए एसएमडीआरएसडी कॉलेज में स्ट्रांग रूम बनाये गए हैं। स्ट्रांग रूम में सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को रखा गया है। इन मशीनों में 11 प्रत्याशियों का भविष्य कैद है।
मतगणना के बाद ही यह पता चलेगा कि जनता ने किसको अपना अगला प्रतिनिधि चुना है और किसको नकार दिया है। पठानकोट के सहायक रिटर्निंग अफसर डॉ अमित महाजन ने बताया कि सुबह आठ बजे ईवीएम खोलकर गिनती शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा के बीच जिला चुनाव अधिकारी की निगरानी में होगी।
उपचुनाव में 8,59,336 मतदाताओं ने डाले हैं वोट
गुरदासपुर उपचुनाव
- फोटो : File Photo
उपचुनाव में 8,59,336 मतदाताओं ने डाले हैं वोट
लोकसभा हलके कुल 15 लाख 17 हजार 436 वोटर हैं। उपचुनाव में कुल 8 लाख 59 हजार 336 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। इनमें 4 लाख 47 हजार 298 पुरुष तथा 4 लाख 12 हजार 038 महिला मतदाता थीं। पठानकोट जिले से संबधित विधानसभा हलरा पठानकोट, भोआ और सुजानपुर की गिनती एसडी कालेज पठानकोट में होगी। गुरदासपुर जिले से संबंधित विधानसभा हलका दीनानगर, गुरदासपुर, डेरा बाबा नानक, फतेहगढ़ चूड़ियां, बटाला व कादियां की गिनती सुखजिंदरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में होगी। दोनो स्थानों के नतीजे सुखजिंदरा इंस्टीट्यूट में एकत्र किए जाएंगे। इसके बाद चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा।
केंद्र और राज्य सरकार के लिए फीडबैक
कोई गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव को जनता के लिए राजनीतिक पार्टियों को परखने के अवसर के रूप में देख रहा है तो कोई इसे केंद्र व राज्य सरकार के लिए फीडबैक समझ रहा है। करीब साढ़े तीन साल पुरानी केंद्र सरकार और सात महीने पुरानी सूबा सरकार के काम से लोग कितने खुश हैं, यह फीडबैक केंद्र और सूबे की सरकार को उपचुनाव के नतीजों से मिलेगा।
एक तरफ यह भी कहा जा रहा है कि डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के लिए हुए उपचुनाव के माध्यम से जनता नए सांसद को परख भी सकती है। नए सांसद के लिए यह कार्यकाल जनता का दिल जीतने का एक मौका होगा। इसका प्रभाव 2019 लोकसभा चुनाव में भी दिखेगा।