शिमला के चर्चित गुड़िया हत्याकांड में आरोपी सूरज सिंह की पुलिस हिरासत में हुई मौत मामले में जिला अदालत में सोमवार को सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी। इस दौरान सीबीआई ने आरोपी आईजी पुलिस जहूर जैदी की जमानत को खारिज करने के लिए अर्जी दायर की। साथ ही सीबीआई ने जैदी की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी करने की भी प्रार्थना की है।
सीबीआई ने अर्जी में सौम्या के बारे में उल्लेख किया कि किस प्रकार उस पर बयान बदलने के लिए जैदी की ओर से दबाव डाला गया। सीबीआई ने कहा कि जैदी को जमानत इस आधार पर दी गई थी कि वह गवाहों पर किसी प्रकार से दबाव नहीं डालेंगे लेकिन आरोपी जहूर जैदी ने अदालत द्वारा दी जमानत का दुरुपयोग किया है इसलिए जैदी की जमानत को खारिज कर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए।
ये है मामला
बता दें कि शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। मामले में एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया, जिनमें नेपाली युवक सूरज भी शामिल था। कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई।
सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस टॉर्चर के कारण थाने में सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच. जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल्स सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया।
इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था। लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।