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हाईकोर्ट ने कहा: भूजल में यूरेनियम का खतरा मालवा तक सीमित हो यह जरूरी नहीं, दोआबा और माझा में भी जांच जरूरी

Sun, 04 Feb 2024 10:36 AM IST
ajay kumar विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के दोआबा और माझा क्षेत्र के प्रत्येक जिले में भू-जल की जांच करने का आदेश दिया है। यह जांच भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर को करना होगा। जांच में पानी में मौजूद यूरेनियम की मात्रा का पता लगाया जाएगा। बता दें कि अधिक यूरेनियम की वजह से पंजाब के कई इलाकों में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मालवा क्षेत्र में और खास तौर पर बठिंडा के भू-जल में यूरेनियम होने और इसके कारण बढ़ते कैंसर के मामलों को लेकर 14 साल से लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब दोआबा और माझा के एक-एक जिले में जांच करने का भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) को आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल मालवा तक सीमित हो यह जरूरी नहीं है, ऐसे में एहतियातन बाकी के दो क्षेत्रों की भी जांच जरूरी है।

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2010 में मोहाली निवासी बृजेंदर सिंह लुंबा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मालवा क्षेत्र के भू-जल में यूरेनियम होने और इससे बढ़ते कैंसर के मामलों का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट को बताया गया था कि इस क्षेत्र में कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन सरकार लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने की दिशा में कोई काम नहीं कर रही है। 

हाईकोर्ट के आदेश पर मालवा क्षेत्र के पानी में यूरेनियम की जांच के लिए भाभा एटॉमिक रिर्सच सेंटर ने बंठिडा, फिरोजपुर, फरीदकोट और मानसा से 1500 पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों में से 35 प्रतिशत नमूनों में यूरेनियम तय मानकों से अधिक पाया गया जिसमें बठिंडा जिला सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है।

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एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक नहीं होनी चाहिए लेकिन बठिंडा जिले के पानी में यह मात्रा 10 गुना से अधिक 684 पीपीबी आंकी गई थी। ऐसे में इस पानी को पीने के लिए ठीक नहीं माना गया था। इसके बाद से ही लगातार हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही थी और सरकार लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे रही थी।

एक फरवरी को सुनवाई के दौरान इस मामले में अदालत का सहयोग कर रहे सीनियर एडवोकेट रुपिंदर सिंह खोसला ने हाईकोर्ट को बताया कि पीने के पानी में यूरेनियम की समस्या की जांच अभी तक केवल मालवा तक सीमित रखी गई है। बाकी के दो क्षेत्रों में भी इसकी जांच करवाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस सुझाव को बेहद अहम मानते हुए अब भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर को दोआबा और माझा के एक-एक जिले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

बठिंडा के लिए सुझाव

सुनवाई के दौरान खोसला ने हाईकोर्ट को बताया कि थर्मल प्लांट बंद होने के बाद वहां के लिए जल का माध्यम रही झीलों का अभी कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यहां पर पानी भाखड़ा नहर से आता है और इसकी सप्लाई बठिंडा के लोगों को स्वच्छ जल के माध्यम के तौर पर की जा सकती है। बठिंडा कंटोनमेंट में भी भाखड़ा से ही पानी की सप्लाई हो रही है।
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