कुरुक्षेत्र जिले की शाहबाद तहसील के गांव मोहरी में आदेश वेलफेयर सोसाइटी की ओर से बनाई गई आदेश हरियाणा यूनिवर्सिटी के तहत आदेश मेडिकल कालेज व अस्पताल को दो साल से अनिवार्य सर्टिफिकेट देने से आनाकानी कर रही हरियाणा सरकार को करारा झटका लगा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोसाइटी की याचिका पर सोमवार को फैसला सुनाते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के एक माह के भीतर उचित निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को अनिवार्यता सर्टिफिकेट जारी किया जाए।
जस्टिस राकेश कुमार जैन की अदालत ने अपने 22 पन्ने के फैसले में हरियाणा सरकार की उन दलीलों को ठुकरा दिया, जिनमें पहले तो आदेश मेडिकल कालेज में आवश्यक सुविधाओं के अभाव की बात की गई और उसके बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने आदेश वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. एचएस गिल के आतंकवादियों से रिश्ते और आतंकवाद में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे। इस पर सरकार ने भी इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोसाइटी को अनिवार्यता सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया था।
जस्टिस राकेश कुमार जैन ने याचिकाकर्ता के हक में फैसला देते हुए कहा कि अगर इंटेलीजेंस ब्यूरो को सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. एचएस गिल जोकि अब सोसाइटी की सदस्यता व चैयरमैन पद छोड़ चुके हैं, के बारे में जानकारी थी तो सोसाइटी को 300 बिस्तर का अस्पताल व मेडिकल कालेज बनाने की मंजूरी क्यों दी गई। उन्होंने कहा कि कोई भी सोसाइटी केवल एक व्यक्ति से नहीं बल्कि उसके सदस्यों द्वारा चलाई जाती है। सोसाइटी के किसी अन्य सदस्य पर कोई आरोप भी नहीं है।
इसके अलावा डॉ. एचएस गिल जोकि सोसाइटी से अलग हो चुके हैं, पर 1983/1984 के दौरान आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए हैं। ऐसे में केवल आरोप के आधार पर सोसाइटी को अनिवार्यता सर्टिफिकेट नहीं देना पूरी तरह गलत है। जस्टिस जैन ने आगे कहा कि 3 जनवरी, 2016 को अतिरिक्त निदेशक द्वारा मेडिकल कालेज का निरीक्षण किए जाने पर पाया गया कि वहां लिफ्ट लगाई जा रही है, फायर सेफ्टी सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा और ब्लड बैंक में रेफ्रिजरेटर सिस्टम व लैब उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं तो इसे मेडिकल कालेज में कमी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
हाईकोर्ट ने 33 साल पुराने मामलों को दरकिनार कर दिया
कोर्ट
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1993 में पंजीकृत आदेश वेलफेयर सोसाइटी ने हरियाणा सरकार से कुरुक्षेत्र के शाहबाद के गांव मोहरी में आदेश हरियाणा यूनिवर्सिटी और एमबीबीएस की 150 सीटों पर दाखिले के लिए अनुमति मांगी थी। इस पर हरियाणा सरकार और उच्च शिक्षा विभाग ने 4 मार्च, 2014 को सोसाइटी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्रदान कर दी।
इन शर्तों में मेडिकल काउंसिल के नियमानुसार निरीक्षण के बाद राज्य सरकार से अनिवार्यता सर्टिफिकेट लेना अवश्य किया गया था। 7 अगस्त, 2014 को सोसाइटी ने 117095.51 वर्ग मीटर भूमि के सीएलयू के लिए सरकार से अनुमति मांगी, जोकि 14 नवंबर, 2015 को प्रदान कर दी गई। इसके बाद सोसाइटी ने 300 बिस्तरों वाले आदेश मेडिकल कालेज व अस्पताल के लिए प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से अनिवार्यता सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की ताकि इस सर्टिफिकेट के आधार पर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से प्रस्तावित मेडिकल कालेज शुरू करने की अनुमति ली जा सके, लेकिन विभाग ने दो महीने तक कोई फैसला नहीं लिया तो सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
इसके बाद सरकार ने निरीक्षण कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सोसाइटी पर आरोप लगाया कि अस्पताल में नकली मरीज बनाकर सर्टिफिकेट लेने की कोशिश की गई। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने एक जांच कमेटी का गठन भी कर दिया। इसी दौरान इंटेलीजेंस ब्यूरो ने सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. एचएस गिल के आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने की बात सरकार के ध्यान में लाई।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी यह मामला जोर-शोर से उठाया, लेकिन हाईकोर्ट ने 33 साल पुराने मामलों जोकि किसी कोर्ट में साबित नहीं हुए थे, को दरकिनार कर दिया। इस बीच डॉ. गिल ने सोसाइटी की सदस्यता और चेयरमैन पद से खुद को अलग कर लिया, लेकिन सरकार सोसाइटी को सर्टिफिकेट जारी करने से इंकार करती रही। इस मामले में हाईकोर्ट के बार-बार दिए आदेशों का पालन नहीं करने पर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव केके खंडेलवाल को भी कई बार हाईकोर्ट में खुद पेश होना पड़ा।