चंडीगढ़ में अब स्कूल ही नहीं, बल्कि किसी भी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की बस बिना ग्लोबल पॉजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) नहीं चल सकेगी। एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को ही जीपीएस की मॉनीटरिंग भी करनी होगी। बाकायदा इसके लिए स्कूल में कंट्रोल रूम बनाना होगा।
जीपीएस अनिवार्य करने का प्रपोजल तैयार हो चुका है। प्रशासन जल्द ही इसे सख्ती से लागू करवाने केमूड में है। प्रशासन का मानना है कि स्कूल बसों ही नहीं कोचिंग इंस्टीट्यूट्स, कॉलेजों व अन्य शिक्षण संस्थानों में भी इस तरह की समस्याएं हैं।
नए नियमों के अनुसार बसों को एनुअल फिटनेस सर्टिफिकेट तभी जारी होगा, जब उनमें जीपीएस रनिंग कंडीशन में होगा। प्रशासन ने इसके लिए सोमवार को शिक्षण संस्थानों और बस ऑपरेटर्स की मीटिंग बुलाई है।
स्कूल नहीं भाग सकते जिम्मेदारी से
प्रशासन प्राइवेट बस ऑपरेटर्स को नहीं स्कूलों को परमिट जारी करता है। परमिट फीस में स्कूलों को इसके लिए अच्छी-खासी छूट भी दी जाती है। ऐसे में स्कूल प्राइवेट ऑपरेटर्स का हवाला देकर खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते। उनकी भी बसों के लिए बराबर जिम्मेदारी बनती है। सभी बसों पर स्कूल का ही नाम लिखा होता है।
स्कूल ही नहीं कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को भी महिला कंडक्टर रखनी होंगी। सिंगल गर्ल स्टूडेंट के लिए भी बस में महिला कंडक्टर रखना अनिवार्य होगा। इसके लिए सोमवार को शिक्षण संस्थानों और प्राइवेट बस ऑपरेटर्स की मीटिंग भी बुलाई गई है।
- सर्वजीत सिंह, फाइनेंस सेक्रेटरी, यूटी