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#हिंदीहैंहमः: वेबिनार में विशेषज्ञ बोले- हिंदी को राजनीति की बजाय तकनीक से जोड़ने की जरूरत

Sat, 22 Aug 2020 08:27 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हिंदी रोजगार की भाषा बन तो रही है लेकिन उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही जितना कि अंग्रेजी। इसका मतलब यह नहीं कि हिंदी विषयों में पढ़ने के लिए युवा नहीं आ रहे हैं। पढ़ाई उतनी ही युवा कर रहे हैं जितने अंग्रेजी विषय में दाखिले हो रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी बाधा हिंदी के युवाओं में दक्षता की कमी दिखती है। साथ ही आत्मविश्वास भी कम झलकता है। इसके लिए जरूरी है कि गहन अध्ययन करें।

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शब्दों पर अच्छी पकड़ बनाएं। उसके बाद नागरिक सेवाओं (सिविल सर्विसेज) से लेकर अनुवादक तक के क्षेत्र में रोजगार के अवसर ही अवसर हैं। सबसे बड़ी बात यह भी है कि सरकारों ने भी हिंदी को राजनीति से जोड़ दिया जबकि हिंदी को तकनीक से जोड़ना चाहिए था। इससे रोजगार के अवसर और मिलते।

अब जरूरत है हिंदी विशेषज्ञों को एक सर्व स्वीकार्य शब्दकोश बनाने की। इस पर सभी को काम करना होगा। यह बातें शनिवार को अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत आयोजित वेबिनार में हिंदी विशेषज्ञों ने कहीं। वेबिनार का विषय था-हिंदी रोजगार की भाषा क्यों नहीं बन पा रही। इस विषय पर विद्यार्थियों ने सवाल भी किए, जिनके विशेषज्ञों ने जवाब दिए।

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संकल्प शक्ति की जरूरत

हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए संकल्प शक्ति और बेहतर दिशा होनी चाहिए लेकिन इन चीजों का अभाव दिखता है। काफी समय पहले हिंदी को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से ही 400 शब्दकोश बनाए गए लेकिन सरकारों ने उन पर अमल नहीं किया जबकि हिंदी प्रदेशों में पूरी तरह उन्हें लागू कर देना चाहिए था। उसके बाद धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी लागू हो जाता। अब जरूरत है हिंदी के विशेषज्ञों को ऐसा शब्दकोश बनाने की जो सभी को स्वीकार्य हो। साथ ही सरकारें हिंदी को तकनीक से जोड़ने का काम करें। डॉ. चंद्र त्रिखा, निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी

पाठ्यक्रम में होना चाहिए बदलाव
राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है। नोटबंदी व धारा 370 की तरह निर्णय लेने होंगे। उसके बाद हिंदी राजभाषा ही नहीं राष्ट्रभाषा भी बनेगी। कठोर निर्णय लेने होंगे। साथ ही पद, प्रतिष्ठा व सम्मान से भी इसको जोड़ना होगा। अंग्रेजी का ट्यूशन हर जगह है लेकिन हिंदी का क्यों नहीं। इसके लिए सोचना होगा। पाठ्यक्रमों में बदलाव करना होगा ताकि वह रोजगार की ओर ले जा सके। साथ ही लोगों को सोच में बदलाव लाना होगा। लोग हिंदी पर पकड़ बनाएं, उसके बाद आत्मविश्वास जाग जाएगा। - प्रो. सुखदेव सिंह मिन्हास, पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पीजीजीसी सेक्टर 11

हिंदी में दक्ष हैं तो नौकरी मिलेगी
हर भाषा का अपना एक महत्व है। हिंदी तेजी से आगे बढ़ रही है। रोजगार भी दे रही है लेकिन रोजगार के लिए हम कितने तैयार हैं और कितने दक्ष हैं, यह देखना होगा। मेहनत करना जरूरी है। यह जरूर हो सकता है कि हिंदी में पारंगत होने के लिए अधिक तैयारी करनी पड़े, लेकिन तैयारी ठीक हो गई तो नौकरी भी मिलेगी। भाषा हमारी ताकत है। विदेशी विश्वविद्यालयों में बाकायदा पढ़ाई जाने लगी है। प्रशिक्षण केंद्र भी हिंदी के लिए विदेशों में खोले जा रहे हैं। - डॉ. गुरमीत सिंह, अध्यक्ष हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय

पाठ्यक्रम को मजबूत करना होगा

हिंदी रोजगार की भाषा बन रही है लेकिन आजादी के बाद उतनी तेजी से नौकरियां नहीं दे पाई। इसके लिए स्कूली स्तर से ही ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करना होगा कि छात्रों में हिंदी के प्रति रुचि दिखे और पढ़ाई के बाद नौकरी मिल सके। पाठ्यक्रमों में भी बदलाव समय-समय पर होना चाहिए। टाइपिंग आदि का कार्य तो छात्रों को स्कूल से ही सिखा देना चाहिए। हिंदी भाषी प्रदेशों की आर्थिक स्थिति से ही हिंदी को जोड़कर देखा जाने लगा है, ऐसा नहीं होना चाहिए। हिंदी के लिए दक्षता की कमी है, संभावनाओं की नहीं। - डॉ. अनिता खोसला, पूर्व उप प्राचार्य, जीसीजी सेक्टर 11

हिंदी के लिए प्रशिक्षण की जरूरत
देश पहले दूसरे देशों पर कई चीजों के लिए निर्भर था लेकिन अब आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में आ गया। हिंदी के पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाना होगा तभी भाषा को और मजबूती मिलेगी और युवाओं को नौकरी। हिंदी में प्रशिक्षण की कमी है। इसे दूर करना होगा। हिंदी स्पष्ट भाषा है जो समझ आ जाती है। इसलिए पहले व्यक्ति अपने से प्रेम करे और फिर भाषा से। यदि भाषा को सीखने के लिए कड़ी मेहनत युवा करते हैं तो नौकरी के अवसर भी मिलते हैं। - डॉ. मनीषा प्रियंवदा, अध्यक्ष हिंदी विभाग, एमसीएम डीएवी कॉलेज
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घर से ही बच्चों को सिखानी होगी हिंदी

हम घर में बच्चों को अंग्रेजी में सब्जियों व फलों के नाम बताते हैं लेकिन उसको हिंदी में क्या कहते हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं देते। बस यहीं से कमी हो जाती है। बच्चों को घर से ही हिंदी सिखानी होगी। देश व संविधान के प्रति प्रेम सिखाना होगा। हिंदी के लिए बाधक बनने वाले राजनीतिक तत्व को हिंदी से दूर करना होगा। हिंदी के शब्द कुछ कठिन हो सकते हैं लेकिन उनको चलन में लाने के बाद सरल हो जाएंगे। लोग उनको जानेंगे। हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषा भी पढ़िये, इससे नौकरी की कमी महसूस नहीं होगी। - डॉ. हेमलता, प्रबंधक राजभाषा, यूको बैंक, चंडीगढ़ सेक्टर 17

प्रयागराज से भी जुड़े लोग, कई ने पूछे सवाल भी
वेबिनार में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से इंजीनियर डॉ. अमित श्याम भी जुड़े। उन्होंने बताया कि बाजार के जिन उत्पादों पर अंग्रेजी में जानकारी पहले दी जाती थी अब वह हिंदी में दी जाने लगी है। क्योंकि लोग उस उत्पाद के बारे में जानना चाहते हैं। साथ ही कंपनियां भी लोगों के करीब पहुंचना चाहती हैं। इसलिए लिए भाषा ही एक माध्यम है। हिंदी का विकास तेजी से हो रहा है।

वेबिनार में पीयू हिंदी विभाग के एमए के छात्र मयंक, रिसर्च स्कॉलर अलका कल्याण, एमसीएम डीएवी कॉलेज की एमए की छात्रा अमनदीप कौर आदि ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे। कहा कि हिंदी के जरिये कौन-कौनसी नौकरियां मिल सकती हैं। शिक्षिका किरण बाला ने भी सवाल किया कि हिंदी को पूरी तरह कब सम्मान मिल पाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि इसके लिए सभी को जमीन पर काम करना होगा।
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