केंद्र सरकार द्वारा करतारपुर कॉरिडोर तैयार करने की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा सियासी फायदा कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को हुआ है। कॉरिडोर को लेकर खूब सियासत हुई, जिसमें एक तरफ नवजोत सिंह सिद्धू तो दूसरी तरफ केंद्र था। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान की ताजपोशी के दौरान बुलाए गए नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान सेना के चीफ के साथ जफ्फी को लेकर विवाद में फंस गए थे।
पाकिस्तान से वापस आने के बाद सात सितंबर को सिद्धू ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई और कहा कि गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर पाकिस्तान करतारपुर से लगी सीमा खोलने वाला है। इसके बाद से सिख समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। सिद्धू ने ऐलान तो कर दिया था, मगर दिक्कत तब शुरू हुई कि पाकिस्तान की तरफ से ऐसी कोई खबर नहीं आई और न कोई ऐलान हुआ।
राजनीति और गर्मा गई, जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की लिखी एक चिट्ठी सामने आई कि भारत सरकार करतारपुर कॉरिडोर का ये मुद्दा तो लंबे समय से उठा रही है। अब तक पाकिस्तान इसके लिए रजामंद नहीं हुआ है और न ही कॉरिडोर खोले जाने के बारे में पाकिस्तान ने भारत को कुछ बताया है। विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह ने भी यही कहा कि दोनों देशों के बीच बहुत पहले से ये बातचीत हो रही है।
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने भी मामले में सिद्धू पर निशाना साधा और कहा कि वे सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जिस करतारपुर कॉरिडोर को अगले साल पाकिस्तान की ओर से खोलने की बात कही जा रही है, हकीकत में ऐसी कोई बात ही नहीं है। इसको लेकर पाकिस्तान तैयार ही नहीं है। इसके बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चिट्ठी लिखकर केंद्र सरकार को कहा कि सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब जाने की इजाजत देने के लिए प्रयास किए जाएं।
कैप्टन ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सामने भी यह मुद्दा उठाते हुए अपील की थी कि वह पाकिस्तान के सामने यह मुद्दा उठाएं ताकि श्रद्धालुओं को श्री गुरुनानक की जन्मतिथि के मौके पर ऐतिहासिक गुरुद्वारे के दर्शन का अवसर मिल सके। सात सितंबर को पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि, भारत से लगने वाली इस सीमा को जल्द ही सिख श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
वह यहां से बिना वीजा के पाकिस्तान आ सकेंगे और वहां बने पवित्र गुरुद्वारे के दर्शन कर सकेंगे। चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार जल्द ही ऐसी व्यवस्था बनाएगी, जिससे सिख श्रद्धालु सुविधाजनक तरीके से करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब आ सकें। इसके लिए भारत से लगने वाली करतारपुर की सीमा को खोला जाएगा।