मॉडर्न हाउसिंग कॉम्प्लेक्स मनीमाजरा के रेलवे फाटक पर बनने वाले रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) को रेलवे के साथ यूटी प्रशासन से भी सभी तरह की मंजूरी मिल गई हैं। सवा 4 करोड़ रुपये से इस आरयूबी का निर्माण होगा। सांसद किरण खेर ने होटल माउंटव्यू में आयोजित प्रेस वार्ता में इसे शहर के लिए एक और सौगात बताया। सांसद ने कहा कि मंजूरी मिलते ही अब इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। निगम चुनाव के बाद दिसंबर के आखिर में इसका निर्माण शुरू होकर सितंबर 2017 तक यह चालू भी हो जाएगा।
आरयूबी 4 लेन का होगा, जिसकी एक तरफ चौड़ाई 18 फुट होगी यानी दोनों तरफ 36 फुट का होगा। इसकी ऊंचाई 10 फुट की होगी। हालांकि इसमें से हैवी वाहन नहीं गुजर सकेंगे। आरयूबी में पानी जमा न हो, इसके लिए यूटी प्रशासन ड्रेनेज सिस्टम बनाएगा। आरयूबी के लिए सांसद खेर ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु, प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, एडवाइजर परिमल राय और चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद का आभार जताया।
बंसल पर फिर साधा निशाना
सांसद ने कहा कि पवन बंसल रेल मंत्री रहते हुए आरयूबी नहीं बनवा पाए। रेल मंत्री के लिए एक आरयूबी कौन सी बड़ी चीज है। उन्होंने सांसद रहते हुए दिल्ली तक की सभी अनुमति ली हैं। पीछे लगकर काम करवाया है।
बंसल बोले, एक दिन कह देंगी चंडीगढ़ को भी उन्होंने ही बनवाया
पवन बंसल
- फोटो : file photo
बंसल बोले, एक दिन कह देंगी चंडीगढ़ को भी उन्होंने ही बनवाया
पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने सांसद किरण खेर को जवाब देते कहा कि अनुमति तो मिल गई, बनवा देंगी तो अच्छी बात है। खेर को पुराने कामों का पता ही नहीं है। एक दिन कह देंगी चंडीगढ़ को भी उन्होंने ही बनवाया है। आरयूबी की मंजूरी से लेकर दूसरे काम उन्होंने खुद बैठकर करवाए थे। फाटक के दोनों ओर से कुछ चीजें हटाई जानी थी।
इम्तिहान नजदीक होने पर सब ज्यादा करते हैं पढ़ाई
15 नवंबर को लागू होने वाली निगम चुनाव की आचार संहिता से पहले शहर को नई सौगात देने के मामले में सांसद खेर ने कहा कि जब किसी के इम्तिहान नजदीक होते हैं तो वह ज्यादा पढ़ता ही है। वह भी शहर के लिए अच्छे काम कर रहीं हैं तो इससे क्या फर्क पड़ता है। पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने भी सांसद किरण खेर की इस बात को ठीक ठहराते हुए कहा कि शहर केलिए काम होना चाहिए। आचार संहिता वाली बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
लाल डोरा एरिया का मामला केंद्र सरकार के हाथ में
सांसद ने कहा कि लाल डोरा एरिया को नियमित करवाने का उनकी पार्टी का एजेंडा था, लेकिन यह काम यूटी प्रशासन के हाथ में नहीं है। केंद्र सरकार ही इस मामले में कुछ कर सकती है। वह इसके लिए प्रयास कर रही है।