ट्राइसिटी में वर्षों से मेट्रो का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। मेट्रो के लिए पंजाब और हरियाणा के बीच चल रही खींचतान खत्म हो गई है। चंडीगढ़ के साथ दोनों राज्यों ने मिलकर मेट्रो को अमलीजामा पहनाने के लिए एमओयू साइन किया है।
वीरवार को पंजाब-हरियाणा के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी की मौजूदगी में मेट्रो के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई। डॉफ्ट को फाइनल मंजूरी के लिए अब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मेट्रो ड्राफ्ट पर राजभवन में आयोजित मीटिंग में चंडीगढ़ के एडवाइजर विजय देव, वित्त सचिव सर्वजीत सिंह, हरियाणा के प्रधान सचिव टाउन एंड कंट्री प्लानिंग पीपी राघवेंद्र राव और पंजाब के नगर एवं आयोजना विभाग के सचिव ए रेणु प्रसाद मौजूद थे।
मेट्रो ड्राफ्ट की राज्यपाल के सामने प्रेजेंटेशन भी दी गई। सूत्रों के अनुसार मीटिंग में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से दिए गए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के सुझाव पर भी चर्चा की गई।
एमओयू में स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसवीपी) बनाने को मंजूरी दी गई है। सूत्रों का कहना है कि एमओयू में स्पष्ट होगा कि ट्राइसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा।
केंद्र से मंजूरी के बाद बनेगी कारपोरेशन
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से मेट्रो की मंजूरी के बाद पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट की दिशा में काम शुरू करेंगे। मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए ग्रेटर चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन का गठन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार कारपोरेशन में 9 लोगों को शामिल किया जाएगा। जिसमें चंडीगढ़ के साथ पंजाब-हरियाणा के अधिकारी होंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव कारपोरेशन के चेयरपर्सन होंगे। कारपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर का चुनाव कारपोरेशन के सदस्यों में से किया जाएगा।
पीपीपी की शर्त हटाई फिर बनी बात
ट्राइसिटी में मेट्रो के लिए पंजाब और हरियाणा के बीच वर्षों से विवाद चल रहा था। पंजाब और हरियाणा की बड़ी आपत्ति मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) मोड में नहीं करने के लिए था। एमओयू के ड्राफ्ट से अब यह शर्त हटा दी गई है। जून में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने प्रोजेक्ट के ड्रॉफ्ट की मंजूरी के लिए पीपीपी मोड पर सिर्फ विचार का सुझाव यूटी प्रशासन को दिया था।
सूत्रों का कहना है कि एमओयू में स्पष्ट होगा कि ट्राइसिटी में मेट्रो के लिए गठित एसपीवी में पंजाब-हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा। एसपीवी का नाम ग्रेटर चंडीगढ़ मॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जीसीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट, 1956 के तहत पंजीकृत होगा। अब जीसीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे ले जाएगी।
प्रोजेक्ट के तमाम फैसले लेने का अधिकार भी कंपनी के पास ही होगा। पंजाब और हरियाणा सरकार जीसीएमटीसी को मेट्रो प्रोजेक्टों के लिए जमीन एक रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से लीज पर देगी। जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत होने वाली प्राइवेट जमीन के मालिकों को मुआवजा संबंधित राज्य नियमानुसार देंगे।
क्या कहते हैं अधिकारी
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा और पंजाब के साथ एमओयू साइन हो गया है। जल्द ही फाइनल ड्रॉफ्ट तैयार कर अर्बन डेवलेपमेंट मिनिस्ट्री को भेजा जाएगा। प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में वीरवार को अहम कदम उठाया गया है।
-सर्वजीत सिंह, वित्त सचिव चंडीगढ़।
कोट
मेट्रो का एमओयू अप्रूव हो गया है। जल्द ही कारपोरेशन का गठन किया जाएगा। प्रोजेक्ट अब तेजी से आगे बढ़ेगा।
-पी राघवेंद्र राव, प्रधान सचिव टाउन एंड कंट्री प्लानिंग हरियाणा।
मेट्रो के लिए 100 करोड़ की इक्विटी जुटाएगा
मेट्रो के लिए बनने वाले ग्रेटर चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट कोरपोरेशन पहले चरण में 100 करोड़ की एक्विटी जुटाएगा। हरियाणा,पंजाब,यूटी और केंद्र सरकार का इसमें 25-25 फीसदी हिस्सेदारी होगी। मेट्रो के रखरखाव के लिए निगम सार्वजनिक निजी भागेजारी(पीपीपी) पर भी विचार करेगा।
मैं अभी खुद एमओयू को देखूंगी। उससे पहले मैं कोई कमेंट नहीं कर सकती। कोई भी प्रोजेक्ट लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर ही तैयार किया जाता है। मेट्रो को बनने में काफी समय लगेगा। अगर शहर के लोगों की राय में मेट्रो से फायदा है तो मुझे भी खुशी होगी।
किरण खेर, सांसद चंडीगढ़
ट्राइसिटी में मेट्रो एक अहम प्रोजेक्ट है। पिछले कुछ वर्षों से चंडीगढ़ में वाहनों की प्रेशर काफी बढ़ गया है। मेट्रो की अब काफी जरूरत महसूस होने लगी है। मेरा मानना है कि मेट्रो को ट्राइसिटी के अलावा जहां तक संभव हो वहां तक लोगों को सुविधा दी जाए।
पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और सांसद चंडीगढ़