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गोल्डफील्ड के 14 छात्रों के दाखिले में फंसा पेंच

Thu, 09 Jun 2016 08:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : demo photo
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फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च  के बंद हो जाने से इसके 14 एमबीबीएस सेकंड ईयर के विद्यार्थियों का भविष्य में अधर में है।

हरियाणा के किसी अन्य मेडिकल काजेल में दाखिला दिलाए जाने की मांग लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे इन विद्यार्थियों की याचिका पर वीरवार को जस्टिस राज मोहन सिंह की वेकेशन बेंच ने सुनवाई करते हुए मुलाना और गुड़गांव स्थित दो निजी मेडिकल कालेज प्रबंधकों को दस्ती आदेश जारी कर तलब कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
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याचिका के अनुसार, 18 सिंतबर, 2014 को माननीय अपेक्स कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम आदेश पर हरियाणा मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च निदेशालय ने वर्ष 2014-15 के शैक्षिक सत्र के लिए गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च में एमबीबीएस कोर्स की 100 सीटों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसमें उक्त 14 याचिकाकर्ताओं को दाखिला मिल गया था।

याचिकाकर्ताओं ने एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई तो इस कालेज में पूरी की लेकिन इसके बाद यह कालेज प्रबंधकों द्वारा बंद कर दिया गया, जिससे उक्त 100 विद्यार्थी संकट में पड़ गए। तब निदेशालय ने राज्य सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की अनुमति से इन विद्यार्थियों को राज्य के अन्य सरकारी और निजी कालेजों में दाखिला दिलाने का फैसला किया।

निदेशालय ने 20 मई, 2016 को विभिन्न कालेजों में दाखिले के लिए पात्रता संबंधी सार्वजनिक नोटिस जारी किया। इसके अनुसार, पीजीआईएमएस रोहतक में 29, बीपीएसजीएमसीडब्ल्यू सोनीपत में और एसएचकेएम मेवात में 14-14, एमएएमसी हिसार में सात, एमएमआईएमएसआर मुलाना में 22 और एसजीटी मेडिकल कालेज गुड़गांव में 14 विद्यार्थियों को एडजस्ट करने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रकार प्रदेश के चार सरकारी और दो निजी मेडिकल कालेजों में  गोल्ड फील्ड के विद्यार्थियों को 64:36 के अनुपात में एडजस्ट करने का फैसला लिया गया।
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निदेशालय ने 30 मई, 2016 को रोहतक स्थित पं. बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंसेस में विद्यार्थियों की काउंसिलिंग करने के बाद पहले 50 विद्यार्थियों को सरकारी मेडिकल कालेजों में दाखिला ?देने का फैसला किया गया। बाकी विद्यार्थियों को निजी मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए कहा गया। लेकिन 64:36 के हिसाब से 14 अन्य विद्यार्थियों को भी सरकारी मेडिकल कालेजों में एडमिशन नहीं दिए जाने के खिलाफ इन विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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