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पंजाब में कपास पर फिर सफेद मक्खी के हमले से हड़कंप

Thu, 09 Jun 2016 08:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
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flying bats - फोटो : Getty Images
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कपास पर सफेद मक्खी का हमले से पंजाब के खेतीबाड़ी विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने आनन-फानन में एहतियाती कदम उठाए हैं। सूबे के कॉटन बेल्ट में दिन-रात कपास की फसल की मॉनिटरिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि कॉटन बेल्ट के आठों जिलों में सफेद मक्खी का आंशिक प्रभाव देखा गया है, लेकिन अबोहर और फाजिल्का ज्यादा प्रभावित हैं।
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फाजिल्का में तीन जगह पर सफेद मक्खी का प्रभाव इकोनॉमिक थ्रेस-होल्ड लेवल से ज्यादा हो गया। इसके बाद खेतीबाड़ी विभाग ने फौरन कीटनाशक स्प्रे करवाकर स्थिति को नियंत्रण में किया। विभाग के डायरेक्टर डॉ. जसबीर सिंह बैंस ने बताया कि जब तक कपास पर सफेद मक्खी का प्रभाव ईटीएल से ज्यादा नहीं होता, माहिर कीटनाशक स्प्रे की सिफारिश नहीं करते हैं।

आंशिक प्रभाव में मित्र कीट ही सफेद मक्खी को कंट्रोल कर लेते हैं। ज्यादा तापमान और ह्यूमिडिटी के चलते सफेद मक्खी का हमला हुआ है। विभाग ने इस बार कॉटन बेल्ट के सभी जिलों में विशेष मुहिम चलाई थी। इसमें नदीन, जंगली झाड़ियों और कांग्रेस घास का सफाया किया गया था, क्योंकि कांग्रेस घास ही सफेद मक्खी का होस्ट प्लांट है। डॉ. बैंस ने दावा किया कि सफेद मक्खी का आंशिक प्रभाव आम बात है, अभी तक कोई खतरे की बात सामने नहीं आई है।
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पंजाब-हरियाणा का कंसल्टेटिव ग्रुप गठित
कपास की खेती की स्थिति का सत्ताधारी अकाली दल के वोट बैंक पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए मुख्य सचिव सर्वेश कौशल ने खुद बठिंडा जाकर उच्चस्तरीय बैठक की। इसके बाद सफेद मक्खी को लेकर पंजाब-हरियाणा का कंसल्टेटिव ग्रुप बनाया गया है। ग्रुप के चेयरमैन पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. बीएस ढिल्लों हैं। इसमें खेतीबाड़ी अधिकारी, माहिर, प्रोफेसर के अलावा सिरसा स्थित कॉटन रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यह ग्रुप जल्द सफेद मक्खी पर कंट्रोल को लेकर अपनी सिफारिशें देगा।

15 मई तक  नहीं हो सकी बिजाई
पिछले साल पंजाब और हरियाणा में कपास की काफी फसल सफेद मक्खी के हमले से तबाह हो गई थी। इसके बाद गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी सिफारिश में देर से बिजाई को अहम कारण बताया था। कमेटी ने 15 मई तक बिजाई पूरी करने की सिफारिश की थी। खेतीबाड़ी विभाग ने किसानों को जागरूक भी किया, लेकिन ऐन वक्त पर नहरी पानी की सप्लाई न मिलने केकारण बिजाई फिर 31 मई तक चलती रही।

पंजाब में कपास की खेती का रकबा घटा
सफेद मक्खी के डर से इस बार कपास का रकबा काफी घट गया है। खेतीबाड़ी विभाग ने पांच लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह रकबा सिर्फ 2.51 लाख हेक्टेयर पर ही सिमट गया। हालांकि सफेद मक्खी केअलावा नहरी पानी की सप्लाई न मिलना भी वजह थी। क्योंकि नहरी सिस्टम की रिपेयर चल रही थी। वहीं, सरकार ने लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी कर दिए। आखिरकार बहुत से किसानों ने कपास छोड़कर धान की खेती का रास्ता अपनाया है।
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