तीन लाख मजदूर...पांच सौ से ज्यादा मजदूर यूनियनें....हक की लड़ाई पर न बोनस, न पर्याप्त कमाई। यह है मजदूरों और उनके लिए संघर्ष करने वाले संगठनों की कहानी। बरसों से चले आ रहे रैली, धरने और प्रदर्शन के बाद भी गगनचुंबी इमारतों को तैयार करने वाले ट्राइसिटी के ये ‘तारे’ जमीं पर ही हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि मजदूरों के लिए संघर्ष जारी है। अधिकार कब मिलेंगे इसका जवाब किसी के पास नहीं?
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मजदूर संगठन आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन, चंडीगढ़ (एकटू) के अध्यक्ष कंवलजीत सिंह ने कहा कि लेबर डिपार्टमेंट में 12 बार मांगपत्र सौंपा जा चुका है। अब तक कोई हल नहीं निकला। एक मजदूर को आठ घंटे की ड्यूटी करनी चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। न्यूनतम मेहनताना तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि संगठन कुछ नहीं करता, संगठन मजदूरों के लिए मांग समय समय पर उठाता रहता है लेकिन अब कानून ही ऐसे हैं कि बिना मजदूर की शिकायत के लेबर विभाग कोई एक्शन नहीं ले सकता। कंवलजीत सिंह ने कहा कि भला कौन मजदूर अपनी नौकरी ताक पर रखकर शिकायत करेगा।
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस चंडीगढ़ के हरजिंदर सिंह ने कहा कि ट्राइसिटी में कम से कम तीन लाख मजदूर काम करते हैं। इनमें फैक्टरी आउटलेट, बड़े मॉल्स और निर्माण कार्य के साथ साधारण लेबर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ट्राइसिटी में सात फीसदी ही संगठित मजदूर हैं और 93 फीसदी असंगठित। ऐसी स्थिति में भी हक की लड़ाई तो लड़ी जा रही है। सीटू, पंजाब के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर ने कहा कि सीटू ने हमेशा मजदूरों की हक की बात की है। उन्होंने कहा कि संगठन ने मजदूरों के लिए बोनस, मजदूरी की मांग उठाई। अब हर मजदूर को बोनस दिलाने की बात की जा रही है।
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यह हैं जरूरी
- फोटो : File Photo
एटीएम की रखवाली करने वाले अभाव में
ट्राइसिटी में करीब तीन सौ एटीएम हैं। कई एटीएम की रखवाली के लिए रखे गए गार्ड के अभाव से जूझ रहे हैं। एक गार्ड के अनुसार न्यूनतम 10 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है और उसमें भी आठ हजार रुपये ही मिलते हैं। एटीएम में यह गार्ड एजेंसी के माध्यम से रखे जाते हैं।
मुख्य संगठन
बीएमएस, एटक, इंटक, सीटू, एकटू
यह हैं जरूरी
ईएसआई डिस्पेंसरी
केंद्र सरकार द्वारा मजदूरों के लिए ईएसआई की सुविधा तो दी गई पर ईएसआई डिस्पेंसरी की सीमित संख्या की वजह से मजदूरों को इलाज नहीं मिल पाता है।
बच्चों के लिए डे केयर सेंटर
ट्राइसिटी में मजदूरी करने वालों के बच्चों के लिए व्यवस्था नहीं है। कई परिवार ऐसे हैं जिसमें पति और पत्नी दोनों ही काम करते हैं।
स्किल डवलपमेंट सेंटर
ज्यादातर मजदूरों में इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप तकनीकी जानकारी नहीं होती। ऐसी स्थिति में मजदूर को कम मेहनताना मिलता है।
जीवन बीमा की सुविधा
ट्राइसिटी के ज्यादातर मजदूरों के लिए जीवन बीमा की सुविधा नहीं है। फैक्टरी, ठेकेपर काम करने वाले ज्यादातर मजदूरों के लिए सुविधा आवश्यक है।
साढ़े तीन सौ रुपये दिहाड़ी
ट्राइसिटी में मजदूरों की साढ़े तीन सौ से पांच सौ रुपये तक दिहाड़ी है। लेबर के लिए ट्राइसिटी में कुछ प्वाइंट रखे गए हैं, जिस पर वे सुबह आठ बजे से ही आकर खड़े हो जाते हैं। इसमें लेबर चौक सेक्टर-20 चंडीगढ़, पांच नंबर कॉलोनी, पंचकूला सेक्टर-17 लेबर चौक, मटका चौक फेज-11 मोहाली शामिल हैं।
मजदूरों की मांग
आठ घंटे की ड्यूटी, बोनस जरूर चाहिए, चार अवकाश का पैसा दें, महिलाओं के लिए मेटरिनिटी बेनिफिट।
मजदूर दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय तौर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत एक मई 1886 को हुई थी।
यहां होंगे आयोजन
चंडीगढ़ सेक्टर-17 में सीटू पंजाब द्वारा 12 बजे रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन, चंडीगढ़ द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।