कर्ज माफ करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन के आइडिया का मजाक उड़ाया जा रहा है, साथ ही कमेटी के प्रस्ताव पर भी सवाल उठने लगे हैं। कमेटी ने पहली बैठक में केरल की तर्ज पर ब्याज मुक्त बॉन्ड जारी करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन पंजाब के खेतीबाड़ी अर्थशास्त्री इससे सहमत नहीं हैं।
बठिंडा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एसएस जौहल ने कहा कि यह आइडिया ही हास्यास्पद है। कौन इंसान आज 100 रुपये देकर सात साल बाद पचास रुपये लेगा। पंजाब के किसानों पर करीब 62 हजार करोड़ का कर्ज है। इस तरीके से इतनी बड़ी रकम जुटा पाना मुमकिन नहीं है।
सरकार केरल मॉडल की बात कर रही है, वहां एनआरआई ने काफी मदद की, लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पिछले दिनों कनाडा के रक्षामंत्री हरजीत सिंह सज्जन के साथ जो बर्ताव किया है, उसके बाद एनआरआई पंजाबी नाराज हैं। वे सरकार की इस पहल में साथ नहीं देंगे।
ब्याज मुक्त बॉन्ड जारी करने का प्रस्ताव
कैप्टन अमरिंदर सिंह
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गौरतलब है कि सरकार ने कर्ज माफी के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज के पूर्व चेयरमैन डॉ. टी हक की अगुवाई में कमेटी बनाई है। इस कमेटी ने शुक्रवार को पहली बैठक के बाद प्रस्ताव दिया था कि केरल की तर्ज पर सात साल के ब्याज मुक्त बॉन्ड जारी किए जा सकते हैं। जोकि न्यूनतम एक लाख रुपये के होंगे।
डॉ. जौहल ने कहा कि सरकार ने जो कमेटी बनाई है, उसमें पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. बीएस ढिल्लों को छोड़कर किसी को पंजाब के बारे में पता ही नहीं है। जिन लोगों को पंजाब के चरित्र और मानसिकता का पता नहीं होगा, वे ही ऐसे सुझाव देंगे। उन्होंने कहा कि केरल की तुलना में पंजाब का कर्ज काफी ज्यादा है।
कैप्टन-मनप्रीत को दी 25 पेज की पॉलिसी
कैप्टन अमरिंदर सिंह
डॉ. जौहल ने बताया कि उन्होंने चुनाव से पहले सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनप्रीत बादल, बादल पिता-पुत्र और अरविंद केजरीवाल को 25 पेज की पॉलिसी सौंपी थी। जिसमें कहा गया है कि कर्ज व्यक्तिगत होता है, समाज का नहीं। सरकार जिलास्तर पर कर्ज निपटारा कमेटियां बनाएं।
रिटायर्ड जज की अगुवाई में बनने वाली कमेटियों में सरकार और लोगों का एक-एक प्रतिनिधि हो। किसान और बैंकों या आढ़तियों को बुला लिया जाए। एक-एक केस देखा जाए। अगर कोई भी किसान कर्ज लौटाने में असमर्थ है तो उसका पूरा कर्ज माफ कर दिया जाए।
जो दे सकने में समर्थ है, उनका कर्ज नहीं माफ करना चाहिए। यह उन लोगों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने कर्ज चुकाया, या जिन्होंने कर्ज लिया ही नहीं। एक साथ सभी किसानों का कर्ज माफ करना ठीक नहीं है।