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पंजाबः तीसरी बार सर्वसम्मति से एसजीपीसी के 44वें अध्यक्ष बने भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल

Thu, 28 Nov 2019 09:17 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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गोबिंद सिंह लोंगोवाल - फोटो : फाइल फोटो
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एसजीपीसी की साधारण सभा की बैठक में गोबिंद सिंह लौंगोवाल को तीसरी बार सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद का ताज पहना दिया गया। शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने तीन वर्ष के बाद फिर सभी पदाधिक ारी बदलते हुए भाई राजिंदर सिंह मेहता को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गुरबख्श सिंह नवांशहर को जूनियर उपाध्यक्ष और हरजिंदर सिंह धामी को महासचिव के पद पर सर्वसम्मति से चुना। वहीं इससे पहले एसजीपीसी के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष सुखदेव सिंह भौर व बलविंदर सिंह बैंस सहित कुल छह सदस्य विरोध स्वरूप साधारण सभा की बैठक का बहिष्कार कर बाहर चले गए।
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साधारण सभा में बैठे शिअद (बादल) के 140 से अधिक सदस्यों ने बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारों से इन नियुक्तियों को अपना समर्थन दिया। अध्यक्ष पद की तीसरी बार सेवा मिलने के बाद नवनियुक्त अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कार्यकारिणी के 11 सदस्यों भूपिंदर सिंह असंध, जगसीर सिंह डब्बवाली, गुरपाल सिंह गोरा, शेर सिंह मंडवाला, बाबी परमजीत कौर लहरा, जसमेर सिंह नासूर, अमरजीत सिंह भलाईपुर, सुरजीत सिंह कंग, इंदरमोहन सिंह, मुखविंदर सिंह खापड़खेड़ी और बीबी कुलदीप कौर टोहड़ा का सर्वसम्मति से चुनाव कर टीम में शामिल किया।

लगभग 15 वर्ष तक एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने वाले हरियाणा के सदस्य व बादल परिवार के रिश्तेदार रघुजीत सिंह विर्क को इस बार कोई भी पद नहीं दिया गया है।
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एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने लौंगोवाल का नाम अध्यक्ष पद के लिए पेश किया। एसजीपीसी के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष अलविंद्र पाल सिंह पखोके व बलबीर सिंह भिंडर ने लौंगोवाल के नाम का अनुमोदन किया। साधारण सभा में बादल विरोधियों की संख्या न के बराबर होने के कारण लौंगोवाल को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुन लिया गया।

इसी तरह राजिंदर सिंह मेहता के नाम का प्रस्ताव अमरजीत सिंह चावला ने पेश किया। भगवंत सिंह स्यालका ने इसका अनुमोदन किया। गुरबख्श सिंह नवांशहर के नाम का प्रस्ताव चरणजीत सिंह जस्सोवाल व ज्ञानी बलदेव सिंह बादल ने रखा। गौरतलब है कि एसजीपीसी के कुल 191 सदस्य हैं जिनमें से सिर्फ 185 को वोट देने का अधिकार है।
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15 सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए मूल मंत्र का जाप किया

लौंगोवाल ने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह सहित 15 एसजीपीसी सदस्यों की मृत्यु पर शोक प्रस्ताव पढ़े। दिवंगत नेताओं की आत्मा की शांति के लिए पांच बार मूल मंत्र का जाप किया गया।

मुख्य कार्यक्रम पर खर्च किए 12 करोड़ और अध्यापकों को 9 माह से वेतन नहीं
इससे पूर्व एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने साधारण सभा की बैठक का एजेंडा पढ़ते हुए अध्यक्ष पद सहित अन्य पदाधिकारियों के चुनाव के बारे में जानकरी दी। इस बीच सुखदेव सिंह भौर अध्यक्ष पद पर बैठे लौंगोवाल के नजदीक आकर इस बात का विरोध करने लगे कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मुख्य कार्यक्रमों के नाम पर 12 करोड़ की राशि खर्च कर दी गई।

वहीं एसजीपीसी द्वारा संचालित स्कूलों व कॉलेजों के अध्यापकों को बीते 9 वर्षों से वेतन नहीं मिल रहा है। इसके अलावा एसजीपीसी अभी तक बरगाड़ी कांड के बारे में कोई भी प्रस्ताव पेश नहीं कर सकी है। दिल्ली व अन्य राज्यों में सिख बच्चों की दस्तार व ककार उतारे जा रहे हैं, इस पर एसजीपीसी खामोश क्यों है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के बारे में आरएसएस व भाजपा के बयान पर एसजीपीसी की चुप्पी के वे विरुद्ध हैं।

एसजीपीसी ने 550वें प्रकाश पर्व पर साधारण सभा का भी अधिवेशन नहीं बुलाया। उन्होंने कहा कि गोबिंद सिंह लौंगोवाल की एक वर्ष की कारगुजारी शून्य है। प्रकाश पर्व के अवसर पर सुल्तानपुर लोधी में एसजीपीसी कर्मचारियों ने गुरु साहिब जी के बेअदबी की, एसजीपीसी प्रधान ने उन पर कोई भी एक्शन नहीं लिया।
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