इस गांव से करीब पांच ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसर हैं। इसके अतिरिक्त गांव के ही सुधीर यादव पुलिस में आईजी हैं। मेजर जरनल यशवंत यादव जो मेजर उमराव सिह के पोते हैं और राष्ट्रपति से सम्मानित हैं। इसके अतिरिक्त आरपीएफ और बीएसएफ में भी 50 से अधिक अफसर इसी गांव से हैं।
गांव के रावरामनारायण देवीलाल सरकार में एमएलए 1977 में बने थे। इसके बाद 1987 में पुन: एमएलए बनने के बाद मंत्री बने। कोसली को लंबे इंतजार के बाद 1978 में सब तहसील व एक नवम्बर 1989 को सब डिविजन का दर्जा मिला।
राजा के नाम पर पड़ा नाम कोसली
सेवानिवृत्त डॉ. सुचेत, पूर्व पंच राजीव यादव, अभे सिंह नम्बरदार ने बताया कि करीब 800 साल पहले गांव के एक हिस्से में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या में लीन थे। शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजरते समय रात होने के कारण यहां रुके तो बाबा ने उन्हें यहीं बसने को कहा। उन्होंने कहा कि आपसे इस गांव को ना तो कोई जीत सकेगा और ना ही हरा सकेगा।
आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा। इसके बाद राजा कोसल ने गांव बसाया और इसके बाद पठानों, नवाब फिरोजपुर झिरका ने इस गांव पर तीन बार आक्रमण किया लेकिन वे यहां से हार कर ही गए। राजा ने गांव के चारों ओर चोवल खाई बनाकर गांव को किला का रूप दिया हुआ था। इसके अलावा 52 बंगला के नाम से भी मिली पहचान मिली।
कोसली मठ सभी की आस्था का केंद्र
गांव का मठ यहां के लोगों की आस्था का केन्द्र है। गांव में विद्यमान कोसली मठ विदेश में भी प्रसिद्ध है। दुनिया के किसी भी कौने में कोसलीया गोत्र के घर पर शुभ कार्य विवाह, बच्चा जन्म होने यहां तक नौकरी पाने पर यहां कोसली मठ में मत्था टेकने जरूर आते हैं। कोसली मठ को कोसलीया गोत्र के ही नहीं बल्कि सभी गोत्रों के लोग पूजते हैं।