कारगिल युद्ध के दौरान आर्मी चीफ रहे जनरल वीपी मलिक ने अपनी नई किताब में खुलासा किया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आर्मी की रिपोर्ट की बजाए खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा कर रहे थे।
उन्होंने खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मान लिया था कि कारगिल में पाक आर्मी नहीं, बल्कि आतंकवादी हैं। युद्ध में 70 प्रतिशत आतंकवादी और 30 प्रतिशत पाक आर्मी है, जबकि आर्मी की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक ,कारगिल में पूरी तरह से पाक आर्मी थी।
पाकिस्तानी सेना ही भारतीय सेना पर गोलाबारी कर रही थी। काफी जोर डालने के बाद खुफिया विभाग और आर्मी की रिपोर्ट की समीक्षा की गई।
इसके बाद केंद्र सरकार ने माना 70 प्रतिशत पाक आर्मी थे और 30 प्रतिशत पाक लड़ाके हैं। पूर्व आर्मी चीफ का कहना है कि वे आज भी पूरे दावे के साथ कहते हैं कि कारगिल में पाक आर्मी का हमला था।
आतंकवादियों का नहीं। यदि उस दौरान बात मान ली जाती तो हालात कुछ और होते।
वीपी मलिक ने अपनी बुक इंडिया मिलेट्री कॉनफिल्कट एंड डिप्लोमेसी में बताने की कोशिश की है कि पालिसी बनाने के दौरान आर्मी को दूर रखा जाता है।
न तो ब्यूरोकेसी इस बात को समझती है और न ही राजनेता। शनिवार को इस बुक का विमोचन चंडीगढ़ के ताज होटल में पत्रकार बरखा दत्त ने किया।
परमाणु परीक्षण की सूचना तीन दिन पहले दी थी
आर्मी चीफ वीपी मलिक ने बताया कि पोखरन में परमाणु परीक्षण की सूचना भी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें नहीं दी थी।
हालांकि, इस बारे में वीपी मलिक को मालूम था। यह एरिया यानी डीआरडीओ आर्मी के नियंत्रण में आता है, इसके बावजूद उन्हें इस बारे में नहीं बताया गया। जब उन्होंने इस बारे में वाजपेयी से बात की तो परमाणु परीक्षण के बारे में बताया गया। यदि वे नहीं पूछते तो शायद आर्मी को आधिकारिक तौर पर उसी दिन ही सूचना दी जाती।
लिट्टे नहीं डाल रहे थे हथियार
वीपी मलिक ने बुक रिव्यू के दौरान बताया कि उनके पास पुख्ता जानकारी थी कि श्रीलंका के लिट्टे हथियार नहीं डालेंगे, जबकि खुफिया विभाग की ओर से बताया गया था कि लिट्टे हथियार छोड़ने के लिए तैयार हैं।
उन्हें यह इनपुट अपने सूत्रों से मिले थे। इस बारे में उन्होंने तत्कालीन अधिकारियों को बताया भी था, लेकिन वे इस बात को हंसकर टाल गए।
विदेश से हथियार मंगवाना देश के लिए शर्मनाक
वीपी मलिक ने कहा कि यह देश के लिए शर्मनाक है कि आज भी हमारे पास 75 प्रतिशत हथियार विदेश से आते हैं। इस बारे में सरकार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही।
इसके लिए प्राइवेट सेक्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यहां पर पूरी तरह से अनदेखी है। यदि प्राइवेट सेक्टर से मदद ली जाए तो हम अपने खुद ही हथियार बना पाएंगे।