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विभाजन के बाद बापू ने यहां के मुस्लिमों को पाक जाने से रोका था

Sun, 04 Oct 2015 02:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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आज 2 अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है। भले ही आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हरियाणा की माटी में आज भी उनकी खुशबू आती है।
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वह देश की आजादी के बाद भी कई बार हरियाणा में आये और लोगों को एकजुट रहने की सीख देकर गए। गुड़गांव के घासेड़ा में मेव को शांति बरतने के लिए कहा गया तो पानीपत में जाकर मुस्लिमों को पाक जाने से रोका।

जब बापू की हत्या कर दी गई तो रोहतक के लोग भी गम में डूब गए और काला झंडा लहराया गया। इन स्मरणों का जिक्र गांधी जी के करीबी रहे पं. श्रीराम शर्मा की किताब में है, जो आज भी रेलवे रोड के पास आश्रम में मौजूद है।
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आजादी से पहले तो गांधी जी पूरे देश में जगह-जगह गए, लेकिन हरियाणा में आजादी के बाद भी वे दो बार आये। वे दोनों बार लोगों को शांति भाईचारा बनाकर रहने की सीख देकर गए। इस तरह के स्मरणों का गांधी जी के करीबी रहे झज्जर के पं. श्रीराम शर्मा की स्वयं लिखित किताबों में जिक्र है।
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गांधी की हत्या के बाद रोहतक व झज्जर में काले झंडे के साथ शोकमय जुलूस

देश की आजादी के बाद वर्ष 1947 में जब बवाल चल रहा था तो गांधी जी गुड़गांव जिले के घासेड़ा गांव में मेव जाति के लोगों के बीच पहुंचे। वहां उनको विश्वास दिलाया कि वे सुरक्षित हैं और उनको डरकर जाने की जरूरत नहीं है।

इस तरह ही वह मुस्लिमों को समझाने के लिए पानीपत भी आए। वर्ष 1948 में जब गांधी जी की हत्या का समाचार रोहतक पहुंचा तो यहां हड़ताल की स्थिति बन गई। हर तरफ सन्नाटा छा गया था। उनकी हत्या के अगले दिन रोहतक व झज्जर में काले झंडे के साथ शोकमय जुलूस निकाला गया, जिसमें पं. श्रीराम शर्मा सबसे आगे रहे।

पं. श्रीराम शर्मा विचार मंच के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार दीक्षित बताते हैं कि यह पं. श्रीराम शर्मा के गांधी जी के साथ को लेकर लिखे हुए चंद संस्मरण हैं, जबकि उनकी कई किताबों में गांधी जी के साथ बड़े मुद्दों को लेकर हुई चर्चाओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।
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