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...जब गांधी के आश्वासन के बाद लाखों मेवाती मुसलमानों ने पाकिस्तान जाने का बदला था इरादा

Wed, 02 Oct 2019 04:15 AM IST
संदीप भट्ट यूनुस अलवी, अमर उजाला, पुन्हाना

सार

  • आजादी के बाद देश का बंटवारा होने पर लाखों मुसलमान पाकिस्तान जाने की तैयारी में थे
  • लोगों का कहना, गांधी का मेवातियों पर बड़ा अहसान है जिन्होंने उन्हें पाकिस्तान में मुहाजिर कहलवाने से बचा लिया
  • लाखों मुसलमान उजड़ने से ही नहीं बचे बल्कि पाकिस्तान जाने का भी बदला इरादा 
  • मेवातियों से किया गांधी का वादा कोई सरकार पूरा न कर सकी, पीने का पानी तक भी नसीब नहीं 
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19 दिसंबर 1947 के मेवात आने की एक अंग्रेजी के अखबार में छपी खबर और फोटो - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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देश के बंटवारे के बाद मेवात के मुसलमान जब पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे थे तब महात्मा गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह ने मिलकर उन्हें भारत में सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया।

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गांधी के विश्वास के बाद लाखों मेवाती मुसलमान पाकिस्तान जाने से रुक गए थे। महात्मा गांधी 19 दिसंबर 1947 को उस समय गांव घासेडा आए जब मेवात के मुसलमानों को जबरन पाकिस्तान भेजा जा रहा था।

लाखों मुसलमान उजड़ने से ही नहीं बचे बल्कि पाकिस्तान जाने का भी बदला इरादा 

गांधी द्वारा देश में मान-सम्मान का भरोसा दिए जाने के वादे के बाद लाखों मुसलमान उजड़ने से ही नहीं बचे बल्कि उन्होंने पाकिस्तान जाने का भी इरादा बदल दिया था। उस दौर के लोगों ने गांधी जी का इसे मेवातियों पर बड़ा अहसान बताया, जिन्हें गांधी ने पाकिस्तान में मुहाजिर कहलवाने से बचा लिया था।

स्वतंत्रता मिलने के बाद देश पूर्ण रूप से आजाद तो हो गया लेकिन दुर्भाग्य से देश का बंटवारा भी हुआ। उस समय मेवात के मुसलमानों को जबरदस्ती पाकिस्तान भेजा जा रहा था। जबकि  हरियाणा और राजस्थान के मुसलमान पाकिस्तान जाने के लिये कतई राजी नहीं थे।

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उस समय हरियाणा के मेवात, गुड़गांव और फरीदाबाद पर अंग्रेज सरकार और राजस्थान के अलवर, भरतपुर पर राजाओं का राज था। जहां इस बटवारे से देश में खून की होली खेली जा रह थी वहीं राजस्थान का मेवात भी इससे अछूता नहीं था। इस वजह से राजस्थान के लाखों मुसलमान पाकिस्तान जाने के लिए हरियाणा के मेवात में आये हुए थे।

19 दिसंबर 1947 को मेवात के गांव घासेडा पहुंच गांधी ने तब लाखों मुसलमानों से क्या कहा 

मेवातियों के साथ हो रहे अत्याचार और जबरदस्ती पाकिस्तान भेजने के मामले को लेकर स्वतंत्रता सेनानी, अब्दुल हई, राजस्थान के हिम्मत खां, यासीन खां व अन्य मुस्लिम नेता महात्मा गांधी से मिले और उन्हें मेवात आने का न्योता दिया। मेवातियों के देश प्रेम को देखते हुए महात्मा गांधी 19 दिसंबर 1947 को मेवात के गांव घासेडा पहुंचे। उनके साथ पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपी चंद भार्गव, रणबीर सिंह हुड्डा के साथ कांग्रेस के काफी नेता थे।

इतिहासकार सद्दीक मेव ने बताया कि महात्मा गांधी ने घासेडा में लाखों मेवाती लोगों के बीच अपना ऐतिहासिक भाषण दिया। उस समय गांधी जी ने कहा था कि आज मेरे कहने में वह शक्ति नहीं रही जो पहले हुआ करती थी। अगर मेरे कहने में पहले जैसा प्रभाव होता तो आज देश का एक भी मुसलमान भारतीय संघ को छोड़कर जाने की जरूरत नहीं करता। न ही किसी हिंदु-सिख को पाकिस्तान में अपना घर बार छोड़कर भारतीय संघ में शरण लेने की जरूरत पड़ती।

महात्मा गांधी ने अपने संबोधन में दुख प्रकट करते हुए कहा था कि यहां जो कुछ हो रहा है उसे सुनकर मेरा दिल रंज से भर जाता है। चारों ओर आगजनी, लूटपाट, कत्लेआम, जबरन धर्म परिवर्तन और औरतों का अपहरण, मंदिर-मस्जिद और गुरुद्वारों को तोड़ना एक पागलपन है, इसे रोका नहीं गया तो दोनों जातियों का सर्वनाश हो जाएगा।

इस मौके पर गांधी ने अपने भाषण में मुस्लिम प्रतिनिधियों द्वारा दिये गये शिकायत पत्र की प्रति लाखों लोगों को पढ़कर सुनाई और उन्होंने मेवातियों को विश्वास दिलाया कि उन्हें पूरा मान सम्मान और सुरक्षा दिलाई जाऐगी।

अगर किसी सरकारी अधिकारी ने मेवातियों के साथ कोई अत्याचार किया तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। गांधी ने कहा कि मेरे शब्द आपके दुख में थोड़ा ढांढस बंधा सके तो मुझे खुशी होगी।

उन्होंने अलवर और भरतपुर की रियासतों से जबरदस्ती निकाले गये मुसलमानों पर दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि भारत में एक समय आएगा जब सारी नफरत जमीन में दफना दी जाएगी और फिर अमन चैन से दोनों समाज रह सकेंगे।

 मेवातियों से किया गांधी का वादा कोई सरकार पूरा न कर सकी, पीने का पानी तक भी नसीब नहीं 

गांव बूबलहेडी निवासी 100 वर्षीय बशीरी का कहना है कि जिस समय गांधी जी ने यह भाषण दिया वह उस मौके पर मौजूद थीं और उस समय उनकी उम्र करीब 25-26 साल की थी। वे गांधी को उघाडा (बिना कपड़ों के) नाम से जानते थे।

वे तो वापस लौट आए लेकिन उनके भाई और रिश्तेदार पहले ही पाकिस्तान जा चुके थे। मेवात के फजरूदीन बेसर, डॉक्टर बशीर अहमद, ऐडवोकेट, महमूदुल हसन ऐडवोकेट का कहना है कि गांधी के सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद यहां के मुसलमान रुक गए थे। अगर उस समय नहीं रुकते तो हरियाणा और राजस्थान में एक भी मुसलमान नहीं होता।

उनका कहना है कि जो भरोसा गांधी ने मेवातियों को दिया उनके वादे को कोई सरकार अभी तक पूरा नहीं कर सकी है। आज भी मेवाती गुर्बत की जिंदगी जी रहे हैं उन्हें रोजगार तो दूर पीने का पानी तक भी नसीब नहीं है।

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