इसके बाद अजीत के परिजन तैयार हो गए। पुलिस मुलाजिम उसके माता-पिता को एंबुलेंस में सिविल अस्पताल लेकर गए। जहां मोर्चरी से शव लेकर पहले अजीत के घर गए। रस्में अदा करने के बाद शव को अरोड़ा पैलेस, दाना मंडी स्थित शमशानघाट में लाया गया जहां अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बेटे के शव को सेहरा बांध रोते रहे पिता
अंतिम संस्कार का समय अजीत का पूरा परिवार बेहाल था। पिता हरजिंदर सिंह बार बार एक ही बात दोहरा रहे थे कि पुलिस ने उनके बेटे को झूठे केस में फंसाया था। अभी उसकी जमानत होने वाली थी। वह इस झूठे केस से बरी भी हो जाता। इसलिए वह अपने बेटे की शादी की सोच रहे थे।
उन्हें नहीं पता था कि उनको बेटे के शव पर सेहरा बांधना पड़ेगा। वहीं अजीत की मां रोते-रोते बोल रही थी, उसके बेटे को जानबूझ कर मारा गया है। उसका बेटा लड़ाई झगड़े में नहीं था। वह तो उससे मिलने के लिए आया था जब वापस जाने लगा तो उसे गोली मार दी गई।
रिकॉर्ड जलने से परेशान जेल प्रबंधक
जेल में हुए हंगामे के दौरान कैदियों ने रिकॉर्ड रूम को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना में जेल का पूरा रिकॉर्ड जलकर खाक हो चुका है। जेल प्रशासन को उक्त रिकॉर्ड न होने से खासी परेशानी आ रही है। जेल प्रशासन अब सारा रिकॉर्ड दोबारा बना रही है ताकि व्यवस्था सही की जा सके।
रिकॉर्ड रूम में सभी हवालातियों और कैदियों का रिकॉर्ड था। उसमें कितने हवालती है और कितने कैदी। उनका एड्रेस, उसके केस की डिटेल, इसके अलावा किस बैरक में कैद का कैदी या हवालाती है, इस सब की डिटेल रिकॉर्ड में थी। पूरे रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने में लगभग 15 दिन का समय लगेगा।