चंडीगढ़। कुमार रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सेक्टर-11डी निवासी विनोद कुमार सिंगला के साथ पांच करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर सेक्टर-11 थाना पुलिस ने फिरोजपुर कैंट निवासी कांग्रेस के पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी के भतीजे सिमरनजीत सिंह, सेक्टर-11 निवासी स्वर्ण सिंह और कांसल निवासी रणधीर सूद व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। फिलहाल मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। आरोपियों ने पीड़ित को कांसल के कैचमेंट एरिया में जमीन बेचकर धोखाधड़ी की, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।
विनोद कुमार सिंगला ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस को सिमरजीत सिंह, पराग इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर स्वर्ण सिंह और उनके सहयोगी रणधीर सूद, हरमनदीप सिंह, विनोद कुमार मौर्य के खिलाफ शिकायत दी है। विनोद कुमार ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उन्हें बातों में फंसाकर कैचमेंट एरिया की जमीन पांच करोड़ में बेच दी।
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वर्ष 2011 में आरोपियों ने किया था संपर्क
विनोद सिंगला के अनुसार, वह चंडीगढ़ के आसपास संपत्ति की तलाश में थे। अगस्त 2011 में आरोपी रणधीर सूद और स्वर्ण सिंह ने उनसे संपर्क कर कांसल स्थित अपनी जमीन बेचने की बात कही। उन्होंने कहा पराग इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड जमीन के बड़े हिस्से का मालिक है। वह अन्य लोगों के साथ कंपनी के निदेशक हैं। ऐसे में वह इस जमीन को बेचने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। रणधीर और स्वर्ण ने कहा संपत्ति पर किसी तरह का कोई विवाद नहीं है, साथ ही जमीन किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में नहीं आती है। यहां निर्माण कार्य किया जा सकता है। विनोद आरोपियों की बातों में आकर रणधीर और स्वर्ण के साथ जमीन देखने गए।
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कहा-बड़ी कंपनियों ने यहां कर रखा है निवेश, हाथ से न जाने दें जमीन
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने जमीन दिखाकर कहा कि जल्द सौदा करने में समझदारी है क्योंकि इस जमीन के आसपास कई बड़ी कंपनियों ने निवेश कर रखा है। इस जमीन के पीछे भी कई लोग हैं, जो खरीदना चाहते हैं। ऐसा न हो कि यह जमीन उनके हाथ से निकल जाए। विनोद कुमार 18 कनाल 12 मरले जमीन लेने को तैयार हो गए। 2 सितंबर 2011 को जमीन खरीदने के लिए पराग इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ रणधीर सिंह के माध्यम से अनुबंध किया।
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दस्तावेज में पता चला कि इनमें कोई भूमि का मालिक नहीं
दस्तावेज मिलने के बाद पीड़ित को पता चला कि रणधीर सूद, हरमनदीप सिंह, विनोद कुमार मौर्य और स्वर्ण सिंह संपत्ति के मालिक नहीं हैं। विनोद कुमार ने तुरंत रणदीप सूद और स्वर्ण सिंह से संपर्क किया। आरोपियों ने माना कि वह संपत्ति के मालिक नहीं हैं। इसके बाद विनोद ने कहा कि अनुबंध के दौरान दिए गए रुपये वापस करें, नहीं तो संपत्ति के असली मालिक से मिलवाएं। उन्होंने बताया कि फिरोजपुर कैंट निवासी कांग्रेस नेता परमिंदर सिंह पिंकी संपत्ति के असली मालिक हैं। इसके बाद परमिंदर सिंह पिंकी ने विनोद को कहा कि चिंता मत करो मामला सुलझ जाएगा। परमिंदर सिंह पिंकी ने कहा कि हम नया अनुबंध पत्र बनाते हैं। भूमि का असली मालिक उनका भतीजा सिमरनजीत सिंह है। 10 सितंबर 2011 को सिमरनजीत सिंह और विनोद सिंगला के बीच अनुबंध हुआ।
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रुपये देकर शुरू करा दिया काम, हाईकोर्ट की स्टे देख लगा झटका
विनोद सिंगला ने आरोपियों को पहले चेक के जरिए 30 लाख, 9 लाख, फिर 16 नवंबर 2011 को आरटीजीएस के जरिए 12 लाख, चेक से 26 लाख, 15 लाख, आरटीजीएस से 30 लाख, 27 फरवरी 2012 को आरटीजीएस से डेढ़ करोड़, 30 मार्च को चेक के माध्यम से एक करोड़ 70 लाख रुपये दिए। अनुबंध और सभी अनुमति लेने के बाद सिंगला ने निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए जमीन पर सीमेंट, स्टील, रेत, ईट मंगवाकर मजदूर लगा दिए। इस दौरान उन्हें तब झटका लगा जब उन्होंने 15 मई 2012 के अखबार में पड़ा कि इस संपत्ति पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इसके बाद विनोद ने आरोपियों से संपर्क किया। इसके बाद पीड़ित ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही कोई निर्णय होगा।