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Chandigarh News: सभी कॉलेजों में शुरू होगा चार वर्षीय बीए-बीएससी डिग्री कोर्स

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से वीरवार को राजीव गांधी कॉलेज भवन में पंजाब और चंडीगढ़ के 110 कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ बैठक की गई। इस दौरान कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-20 को लागू करने के लिए चर्चा की गई। इसमें पीयू अधिकारियों ने कॉलेजों को बताया कि प्राथमिकता के तौर पर आगामी सत्र में बीए और बीएससी में चार वर्षीय डिग्री कोर्स को शुरू किया जा रहा है। इसके लिए अभी फिलहाल पहले दो सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में ही बदलाव आएगा। इसकी तैयारी के लिए पीयू की ओर से कई बैठकें और सत्र आयोजित करवाए जाएंगे। मई माह तक कॉलेजों को एनईपी के बदलावों सहित नए सत्र में यूजी दाखिले के लिए तैयार होना पड़ेगा।
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कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्राचार्यों की बैठक की अध्यक्षता वाइस चांसलर प्रो. रेणु विग की ओर से की गई। इस दौरान डीयूआई प्रो. रूमिना सेठी, अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. हर्ष नैय्यर, डीसीडीसी प्रो. संजय कौशिक, एनईपी समन्वयक प्रो. लतिका शर्मा, प्रो. अनिल मोंगा भी उपस्थित रहे और प्राचार्यों को नए बदलावों की जानकारी दी। प्रो. रुमिना सेठी ने कॉलेजों को एनईपी के सफल कार्यान्वयन के लिए कॉलेजों में एनईपी सेल स्थापित करने की सलाह दी, जिससे हर छोटे पहलू पर बारीकी से काम किया जा सके और परेशानी नहीं हो। वहीं वैल्यू एडेड कोर्स और स्किल कोर्स के लिए भी अलग से सेल बनाकर इस पर काम किए जाने पर भी चर्चा हुई। कॉलेजों में रिसर्च सेंटर नहीं होने के डॉ झांझी के सवाल पर प्रो. हर्ष नैय्यर ने जवाब दिया कि पीयू ने पीएचडी की नई गाइडलाइन को अंतिम रूप दे दिया है, इसे जल्द ही लागू करवाया जाएगा। इसके साथ ही जिला कॉलेजों और कलस्टर कॉलेजों में भी रिसर्च सेंटर खोले जाएंगे जिससे शोध करवाने का सारा बोझ पीयू के ऊपर नहीं पड़े।


एजुकेशन कॉलेजों में अभी नहीं होगा बदलाव, कानून के कोर्स में भी छूट : वाइस चांसलर प्रो. रेणु विग ने प्राचार्यों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि एनईपी को एजुकेशन कॉलेजों के लिए तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जब तक कि उन्हें एनसीटीई से दिशा-निर्देश नहीं मिलते हैं। इसके अलावा कानून के पाठ्यक्रम 3/5 वर्ष (तीन वर्षीय लॉ और पांच वर्षीय लॉ) में केवल च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम शुरू किया जा रहा है। इस दौरान प्राचार्यों ने छात्रों के लिए पीयू की वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली बनाने की भी मांग की और माइग्रेशन इत्यादि के काम ऑनलाइन करने की अपील की जिससे पंजाब के कॉलेजों के छात्रों को पीयू के चंडीगढ़ में चक्कर नहीं काटने पड़े।
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मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का मिलेगा विकल्प
प्रो. लतिका ने प्रेजेंटेशन में बताया कि एनईपी के तहत यूजी कोर्स में छात्र 120 क्रेडिट पूरा करने पर तीन साल में यूजी डिग्री और 160 क्रेडिट पूरा करने पर चार साल में ऑनर्स की डिग्री ले सकते हैं। अगर वे रिसर्च स्पेशलाइजेशन की तरफ जाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने चार साल के पाठ्यक्रम में एक रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू करना होगा, इससे उन्हें रिसर्च स्पेशलाइजेशन के साथ ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। छात्रों के पास मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प भी होगा। अगर वे किसी कारणवश तीन साल से पहले कॉलेज छोड़ देते हैं और अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाते हैं तो उन्हें अगले सालों में फिर से अपनी पढ़ाई पूरी करने की इजाजत दी जाएगी। लेकिन इसके लिए यूनिवर्सिटी की ओर से एक तय मापदंड और दिशानिर्देश बनाए जाएंगे। करिकुलम में मेजर स्ट्रीम कोर्सेस, माइनर स्ट्रीम कोर्स, अन्य विषयों के पाठ्यक्रम, भाषा कोर्स, स्किल कोर्सेज और एनवायरमेंटल एजुकेशन पर पाठ्यक्रम का एक सेट, डिजिटल और तकनीकी समाधान, हेल्थ एंड वैलनेस, योग शिक्षा और खेल एवं फिटनेस इत्यादि को शामिल किया जाएगा।
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