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बराड़ ने फिर पार्टी हाईकमान पर निशाना साधा

Wed, 20 Aug 2014 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस से निलंबित पूर्व सांसद जगमीत बराड़ ने एक बार फिर पार्टी हाईकमान पर निशाना साधा है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हुए अपने निलंबन को गैर लोकतांत्रिक बताते कहा कि इसमें पार्टी संविधान को दरकिनार किया गया। हाईकमान इस बात से अंजान है कि देश भर में वर्करों की उम्मीदें टूट चुकी हैं।
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बराड़ ने कहा कि उनके निलंबन को बीरेंद्र सिंह के साथ जोड़ना दर्शाता है कि लीडरशिप कुछ समझ ही नहीं रही। न तो किसी ने उनका बयान पढ़ा, न आकलन किया। उनके केस और निलबंन के मामले में एआईसीसी की हाई पॉवर अनुशासनात्मक कमेटी की मीटिंग ही नहीं बुलाई गई। न ही उन्हें पक्ष रखने के लिए बुलाया गया। उन्हें निलंबन का पत्र भी नहीं मिला। वह सिर्फ मीडिया में जारी किया गया।

बराड़ ने पार्टी प्रधान सोनिया गांधी पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एआईसीसी महासचिव जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह के बयान उनसे भी ज्यादा गलत प्रभाव देने वाले थे।
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द्विवेदी ने कहा था कि लोकतांत्रिक पार्टी में वन-वे ट्रैफिक नहीं होता। हमें सुनने को धैर्य रखना चाहिए। वहीं, दिग्विजय ने कहा था कि राहुल गांधी में शासक बनने का सामर्थ्य नहीं है। इन दोनों को कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किए गए। उनकी बातों को एके एंटनी ने अपनी रिपोर्ट में दोहराया है।

बराड़ ने हाईकमान को आगाह किया कि इस अन्याय से वे कांग्रेसियों की नजरों में और गिर जाएंगे। वफादारों और दगाबाजों में फर्क समझें। आखिर में उन्होंने पार्टी प्रधान से कहा कि इस हार की जिम्मेदारी सबकी है। उनके विचारों का मकसद सिर्फ पार्टी को सुधारना था, ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सके।

उनका किसी से व्यक्तिगत विरोध नहीं है। वह इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और आपके वफादार रहे हैं। ऐसे कदम उठाने से पहले सोचें। अब समय आ गया है कि पार्टी विचारों और आदर्शों पर ध्यान केंद्रित करे, न कि शख्सियतों पर।
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