आरोप लगाया कि सम्मेलन में लोगों को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने भड़काऊ भाषण दिया, जिसमें सिर काटने की बात कही गई। इससे उनकी भावनाएं आहत हुईं, जब पुलिस को मामले की शिकायत दी तो पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने मामले में पुलिस अधीक्षक से जांच रिपोर्ट मांगी। इसके बाद बाबा रामदेव को समन भेजकर जवाब मांगा। अदालत ने बाबा रामदेव के पेश न होने पर 27 जनवरी तक गैर जमानती वारंट जारी किए थे। सोमवार को मामले की सुनवाई से पहले शिकायतकर्ता बतरा ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
बतरा बोले- अब मेरी भावनाएं आहत नहीं हैं
जिस समय अदालत में याचिका दाखिल की थी, उस समय बाबा रामदेव के भाषण से मेरी भावनाएं आहत हुईं थीं लेकिन अब नहीं हैं। इसलिए याचिका वापस ले ली है। - सुभाष बतरा, पूर्व मंत्री
अभी केस में आरोप तय तक नहीं हुए थे: चुघ
अदालत की तरफ से बाबा रामदेव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। हालांकि कोर्ट ने एसपी की रिपोर्ट के बाद आईपीसी की धारा 124ए हटा दी थी। केवल 153ए व 153 बी के तहत समन जारी किए थे। केस में आरोप तय नहीं हुए थे। उससे पहले ही याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली। - ओपी चुघ, वकील शिकायतकर्ता पक्ष