उसके बाद निर्मल सिंह ने अंबाला कैंट सीट से गृहमंत्री अनिल विज के खिलाफ अपनी पार्षद बेटी चित्रा सरवारा के लिए कांग्रेस हाईकमान से टिकट मांगा। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी चित्रा की टिकट के लिए हाईकमान पर काफी दबाव बनाया। मगर अंबाला लोकसभा की सभी नौ विधानसभा सीटों के टिकट वितरण में अंबाला की ही पूर्व लोकसभा सांसद एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा की ही चली और चित्रा को टिकट नहीं मिल पाया।
बस, इसी बात से नाराज होकर खुद चुनाव न लड़ने का एलान करने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने खुद को अंबाला शहर और बेटी चित्रा को अंबाला कैंट सीट पर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतार दिया। दोनों बाप-बेटी की इस बगावत का नतीजा यह रहा कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। अब अंतत: निर्मल सिंह ने अपनी नई पार्टी का गठन कर दिया है।
प्रेसवार्ता के दौरान निर्मल सिंह ने कहा कि 15 मार्च को अंबाला शहर अनाज मंडी में पहला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। अंबाला, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर में उनकी पार्टी अगामी जिला परिषद और निकाय चुनाव भी लड़ेगी। निर्मल ने कहा कि जल्द ही प्रदेश और फिर जिला स्तर पर पार्टी की कार्यकारिणी घोषित की जाएगी। उनके अनुसार पार्टी प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों, दादुपुर नलवी नहर, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेंशन इत्यादि समेत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर जनता की लड़ाई जनता के बीच रहकर लड़ेगी। पूर्व युकां महासचिव हिम्मत सिंह ने अनुसार जल्द ही पार्टी अपना सदस्यता अभियान भी शुरू करेगी।