मनीमाजरा। प्रशासन द्वारा मनीमाजरा को सेक्टर 13 बनाने की प्रक्रिया पूरे करने के विरोध में मंगलवार को पूर्व मेयर सुरेंद्र सिंह ने एक प्रेसवार्ता करके इस पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मनीमाजरा को सेक्टर-13 न बनाकर मनीमाजरा नाम ही रहने देने के लिए एक ज्ञापन भी तैयार किया है। इसे वह कल चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को देकर आएंगे। इस प्रेसवार्ता में उनके साथ एचएसटी के चेयरमैन रामेश्वर गिरि, ऑल मनीमाजरा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसएस परवाना, कांग्रेसी नेता आरपी र्श्मा और डा. रणजीत गौतम भी शामिल थे।
इस ज्ञापन में उन्होंने लिखकर बताया कि मनीमाजरा एक एतिहासिक शहर है। इसका इतिहास 400 साल पुराना है। मनीमाजरा के सबसे पहले राजा गरीब दास बने थे। जिनका यहां के आस पास के एरिया के 48 गांव पर राज थे। जिसमें खरड़, मुल्ले पर से लेकर गग्गर नदी के पास आस पास का एरिया था। गरीब दास को राजा बनाने में माता राज कौर जी का आशीर्वाद था। माता राज कौर जी का एतिहासिक गुरुद्वारा यहां बना हुआ।
मनीमाजरा के राजा ने ही माता मनसा देवी के मंदिर का निर्माण करवाया। यहां के राजा ने मनीमाजरा के किले के अंदर से माता मनसा देवी जी तक एक सुरंग बना रखी थी। उसी से वह और रानिया माता जी के दर्शन करने जाते थे। इसके अलावा जब 1947 में देश का विभाजन हुआ तब भी मनीमाजरा में किसी प्रकार का कोई दंगा फसाद नहीं हुआ। इस शहर में हिंदू, सिख और मुसलमान भाईचारे की तरह रहकर एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं।
वहीं, रामेश्वर गिरि का कहना कि प्रशासन के अधिकारी क्यों आंखें बंद करके मनीमाजरा को सेक्टर-13 बना रहे हैं। यह सेक्टर की संख्या के अनुसार भी ठीक नहीं है, क्योंकि सेक्टर 12 पीजीआई है। पीजीआई के सामने बना पंजाब यूनिवर्सिटी सेक्टर 14 चंडीगढ़ के दूसरे कोने पर है। वहीं मनीमाजरा चंडीगढ़ के दूसरे कोने पर बसा हुआ है।