हेरोइन तस्करी के मामले में आईपीएस साजी मोहन ने एटीएस की पूछताछ में कई अहम खुलासे किए थे। साजी मोहन ने एटीएस को बताया था कि वह तस्करों से बरामद हेरोइन को बाजार में बेच देता था और उसकी जगह पर चूना या फिर पाउडर रख देता था ताकि इससे किसी को शक न हो कि हेरोइन वहां से कम हो रही है। साजी मोहन पर हेरोइन तस्करी का आरोप था।
इस गिरफ्तारी के बाद एक और खुलासा हुआ था, जिसमें साजी मोहन ने मालखाने से 13 लाख 81 हजार रुपये का गबन किया था। इसके बाद साजी मोहन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने साजी मोहन व एक अन्य के खिलाफ 420 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था।
मार्च 2009 में मुंबई एटीएस ने हेरोइन तस्करी और बेचने के आरोप में एनसीबी के तत्कालीन जोनल डायरेक्टर और 1995 बैच के आईपीएस साजी मोहन को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। उसके पकड़े जाने के बाद एनसीबी ने अपने मालखाने का रिकार्ड चेक किया।
चेकिंग के दौरान 15 मई, 2008 को जम्मू-कश्मीर बार्डर से जब्त की गई 60 किलो हेरोइन की जगह मालखाने में महज 30 किलो हेरोइन मिली थी। 30 किलो हेरोइन कम होने की जांच के दौरान पता चला कि साजी मोहन ने उक्त हेरोइन को अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बेच दिया।
आरोप के मुताबिक, इसमें से 10 किलो हेरोइन साजी मोहन ने तस्कर नसीब चंद को दे दी थी। एनसीबी ने साजी मोहन समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। एटीएस को साजी मोहन ने बताया था कि वह तस्करों से बरामद हेरोइन को बाजार में बेच देता था और उसकी जगह पर चूना या पाउडर रख देता था।
गबन किए गए रुपये साजी मोहन को पीयू स्थित बैंक में जमा करवाने के लिए दिए गए थे, लेकिन उसने रुपये जमा करवाने के बजाय गाड़ी खरीद ली थी। इसके बाद एटीएस ने साजी मोहन के करीबी रहे सारे पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ चंडीगढ़ के नारकोटिक्स ब्यूरो के कर्मचारियों से भी सबूत जुटाए।
एटीएस ने उसके हर बयान की पुष्टि के लिए एनसीबी के अधिकारियों से भी पूछताछ की। अदालत ने साजी मोहन और एक अन्य साथी पर वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार की साजिश रचने और गबन के आरोप तय किए थे।
करीब चार साल बाद जम्मू कैडर के 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व एनसीबी जोनल डायरेक्टर साजी मोहन को जिला अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के मामले में दोषी करार दिया था। बता दें कि मालखाने से रुपये निकालने के मामले में वर्ष 2013 में जिला अदालत साजी मोहन को 13 साल की सजा और तीन लाख रुपये जुर्माना कर चुकी है।
साजी मोहन को 15 साल की जेल, हरियाणा के कांस्टेबल को भी कैद
मुंबई की एक विशेष अदालत ने पूर्व आईपीएस अधिकारी साजी मोहन को मादक पदार्थ रखने और उसकी तस्करी का दोषी ठहराते हुए 15 साल कैद की सजा सुनाई है। एनडीपीएस विशेष अदालत ने 2009 के इस मामले में हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल राजेश कुमार कटारिया को भी 10 साल कैद की सजा सुनाई है।
तत्कालीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल निदेशक और ईडी के संयुक्त निदेशक मोहन और कटारिया को नशीला पदार्थ रखने और उसकी तस्करी की साजिश में गिरफ्तार किया गया था। कांस्टेबल कटारिया उस वक्त साजी मोहन का ड्राइवर था। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 40 गवाहों से सवाल-जवाब किए। इसके साथ ही साजी मोहन और ड्रग माफिया के बीच फोन पर चार बार हुई बातचीत को भी रिकॉर्ड पर लिया।
पूर्व अधिकारी के कब्जे से 12 किलोग्राम हेरोइन जब्त किया था
महाराष्ट्र के एटीएस ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के कब्जे से 12 किलोग्राम शुद्ध हेरोइन जब्त किया था। मादक पदार्थ को जम्मू-कश्मीर सीमा पर कथित तौर पर तस्करी के जरिये लाया गया था। एटीएस के अनुसार, साजी मोहन चंडीगढ़ में एनसीबी के जोनल निदेशक रहते नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जब्त नशीले पदार्थ में से 50 फीसदी की चोरी की थी और उन्हें मुंबई सहित अन्य शहरों में ड्रग माफिया को बेचा था।