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15 लाख किसके?: 17 साल में भी पता नहीं लगा पाई सीबीआई, कोर्ट में पलट गए गवाह, सभी सबूत झूठे, पूर्व जस्टिस बरी

Sun, 30 Mar 2025 11:20 AM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ के चर्चित जज नोट कांड में शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने हाई कोर्ट की पूर्व जस्टिस समेत सभी चारों आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि मामले में 17 साल जांच के बाद भी सीबीआई यह पता नहीं लगा पाई कि आखिरकार 15 लाख रुपये किसके थे। 
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सीबीआई - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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13 अगस्त 2008 की रात को हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस निर्मलजीत कौर यादव की कोठी पर बैग में भरकर पहुंचे रिश्वत के 15 लाख रुपये किसके थे, 17 साल बाद भी सीबीआई की जांच टीम पता नहीं लगा पाई। सीबीआई ने कागजों में रिश्वत पूर्व जस्टिस निर्मल यादव की बताई और कई अहम गवाह व सबूत भी एकत्र किए, लेकिन सीबीआई के मुख्य गवाह कोर्ट में गवाही के दौरान बयानों से मुकर गए और सारे सबूत भी झूठे निकले। गवाहों के बयान बदलने से लेकर मामले में एकत्र सबूत रिश्वतकांड को साबित नहीं कर पाए। इसी कारण सीबीआई की कोर्ट ने पूर्व जस्टिस निर्मल यादव सहित चारों आरोपियों को बरी कर दिया।

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सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में बताया था कि पंचकूला के सेक्टर-16 स्थित एक प्लॉट को हुडा विभाग द्वारा रमनी मल्होत्रा के नाम अलॉट किया गया था। इसी प्लॉट को लेकर दो पक्षों के बीच आपसी विवाद हो गया और मामला पंचकूला जिला कोर्ट में पहुंच गया। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में निर्मल यादव की बेंच के पास पहुंच गया। कुछ महीने बाद ही हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला संजीव बंसल पक्ष में सुना दिया। इसी मामले में हरियाणा महाधिवक्ता संजीव बंसल के मुंशी 15 लाख रुपये का बैग लेकर हाईकोर्ट की जस्टिस निर्मलजीत कौर के आवास पर पहुंच गए थे जबकि यह पैसोें से भरा बैग जस्टिस निर्मल यादव के आवास पर पहुंचाया जाना था। इस मामले में सीबीआई द्वारा पहले तो वर्ष 2011 में क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई कोर्ट में दायर कर दी गई थी लेकिन कोर्ट ने इसे एडमिट करने से मना कर दिया था। इसके बाद कोर्ट के आदेशानुसार सीबीआई ने मामले में दोबारा जांच शुरू की और जस्टिस निर्मल यादव सहित अन्य चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।

लेकिन सीबीआई द्वारा आरोपियों के खिलाफ खड़े किए गए गवाह एक-एक करके कोर्ट में अपने बयानों से ही बदल गए और बयान बदल दिए। इसके बाद सीबीआई ने इन गवाहों की दोबारा गवाही करने के लिए आवेदन किया लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद जांच टीम हाईकोर्ट में पहुंची और 25 गवाहाें के बयान दोबारा दर्ज करने की अर्जी दायर की। लेकिन हाईकोर्ट ने केवल 10 गवाहों की गवाही करवाने की मंजूरी दी और इसी मार्च महीने में सीबीआई ने 5 गवाहों की दोबारा गवाही करवाई। सीबीआई इन रिश्वत के पैसों को अभी तक पूर्व जस्टिल निर्मल यादव के ही मानती रही लेकिन वह कोर्ट में इसे साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रही। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि जब यह पैसे मुकदमा दर्ज करवाने वाली हाईकोर्ट की जस्टिस निर्मलजीत कौर के नहीं थे और कोर्ट में पूर्व जस्टिस निर्मल यादव के भी साबित नहीं हुए तो आखिरकार यह पैसे किसके थे और किसने भेजे थे।

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