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एक शख्स के काफी करीब थे अटल बिहारी वाजपेयी, जमीन पर बैठकर खाते थे खाना...5 दिलचस्प किस्से

Fri, 17 Aug 2018 05:11 PM IST
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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atal bihari vajpayee
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यूं तो कई लोगों के करीब थे, लेकिन एक शख्स के साथ उनका खास लगाव था। उन्हें जमीन पर बैठकर खाना पसंद था, पढ़ें 5 दिलचस्प किस्से।
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डॉक्टर मंगलसेन से रहा करीबी रिश्ता
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रोहतक से गहरा जुड़ाव रहा। 1960 में जनसंघ के समय तो तीन माह तक बड़ा बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में गुजारे। भाजपा के दिग्गज नेता रहे डॉक्टर मंगलसेन से उनका करीबी रिश्ता था। आखिरी बार पूर्व प्रधानमंत्री 2005 के विधानसभा चुनाव में आए और जाट कॉलेज में जनसभा को संबोधित किया। उनको नजदीक से जानने वाले भाजपा के बुजुर्ग नेता व कार्यकर्ताओं का कहना है कि अटल नेता नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे, जिनको देखकर ही जोश आ जाता था।

लाइन में लगकर खाते थे खाना
भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह बड़ौली ने बताया कि यहां हिंदू कालेज में संघ शिक्षा वर्ग का प्रथम वर्ष का शिविर लगा था और उसमें भी शामिल होने के लिए पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी आए थे। उस शिविर में उनके सरल व्यवहार से हर कोई प्रभावित हुआ था, क्योंकि वह सभी के साथ लाइन में लगकर खाना खाते थे और आम कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर ही खाना खाते थे। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर उनसे जुड़े लोगों को सबसे ज्यादा झटका लगा है।
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जमीन पर बैठकर गुड़ के साथ रोटी खाई थी

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जींद से भी कई यादें जुड़ी हैं। उस समय हालांकि जींद में भाजपा बहुत मजबूत राजनीतिक दल नहीं था, लेकिन कई बार वे जींद आए थे। प्रधानमंत्री रहते हुए भी एक बार पंजाब जाते समय औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्टरी में रुके थे। वहीं 1981 में भाजपा किसान मोर्चा के कार्यक्रम में शिरकत करने आए अटल बिहारी वाजपेयी ने गोपाल स्कूल में जमीन पर बैठकर गुड़ के साथ रोटी खाई थी।

उस समय किसान मोर्चा के नेता रहे और हरियाणा हाउसिंग फेडरेशन के चेयरमैन डॉ. ओपी पहल ने बताया कि उस समय तक सुषमा स्वराज ने भाजपा ज्वाइन नहीं की थी, लेकिन वे उनके साथ आई थीं। डॉ. ओमप्रकाश पहल के अनुसार एक बार अटल बिहारी वाजपेयी वर्तमान पालिका बाजार में आए थे। उस समय यहां जनसभा की गई थी। इसके अलावा नरवाना में भाजपा का प्रदेश सम्मेलन हुआ था। उस समय वाजपेयी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और नरवाना के सम्मेलन में शिरकत की थी।

हर पल मुस्कराते रहते थे अटल  
सल्लारा मोहल्ला निवासी 67 वर्षीय मदनलाल ने बताया कि 1960 की बात है, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते थे। वह रोहतक आए और बड़ा बाजार स्थित कार्यालय में तीन माह तक रहे। मैं अटल बिहारी वाजपेयी, डॉक्टर मंगलसेन व किशन लाल शर्मा के कपड़े धुलाकर लाता था। उनकी सेवा करने का मौका मिला। वह हर पल मुस्कराते रहते थे। उनके निधन से बेहद आहत हूं।

..जब अटल ने मुझे गोद में उठा लिया
प्रताप मोहल्ला निवासी अजय खनिजो ने बताया कि 1985 में रोहतक विधानसभा का उपचुनाव था। भाजपा से डॉक्टर मंगलसेन मैदान में थे, जबकि कांग्रेस की ओर से लाला सेठ किशनदास मैदान में थे। उस समय मेरे पिता चमनलाल खनिजो जिलाध्यक्ष थे। हिंदू कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं की मीटिंग ली। इसके बाद वे हमारे घर चाय पीने आए थे, जब फोटो खींची जा रही थी, तब उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया था।

मिसरी व काली मिर्च रखते थे हर पल

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भाजपा कार्यकर्ता गुलशन भाटिया ने बताया कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी जब भी रोहतक आते थे, उनके लिए मिसरी व काली मिर्च की स्पेशल व्यवस्था करते थे। क्योंकि अपने संबोधन के दौरान कभी भी मिसरी व काली मिर्च मांग लेते थे।
 
जब अटल देने लगे 40 रुपये चप्पल के
भिवानी स्टैंड पर जूतों की दुकान चलाने वाले 93 वर्षीय शिवदत्ता ने बताया कि 1963 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कलानौर में जनसभा थी। इसी बीच उनकी चप्पल गायब हो गई। मैं 40 रुपये में उनके लिए चप्पल खरीद कर लाया। अटल जी, पैसे देने लगे, मैंने मना कर दिया। फिर भी जबरन पैसे उन्होंने दिए थे।

आगे कैसे बढ़ू, स्टेज से गिर जाऊंगा
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बंसल ने बताया कि वाजपेयी काफी हंसमुख थे। 1997 में पुलिस लाइन में जनसभा थी। जब अटल संबोधन करने के लिए मंच पर आए तो कार्यकर्ता नारे लगाने लगे कि, अटल जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। मजाक में अटल बोले, आगे कैसे बढ़ू, स्टेज से गिर जाऊंगा। यह सुनकर कार्यकर्ता हंसने लगे।

बाबरा के रसगुल्ले बेहद पसंद थे अटल को
भाजपा चंद्रभान सिंगला ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बाबरा मोहल्ला के रसगुल्ले काफी पसंद थे। जब वे बाबरा मोहल्ला में लाला हुकमचंद गोयल के घर आए तो उनके सामने स्पेशल तौर पर रस्सगुल्ले रखे गए।

जब सीढ़ियां बनानी पड़ी छोटी-छोटी
भाजपा के निवर्तमान पार्षद अशोक खुराना ने बताया कि 2005 में अटल की जाट कॉलेज में जनसभा थी। उस समय उनके पैरों में दर्द रहता था। इस कारण जब स्टेज का निर्माण करवाया गया तो सीढ़ियां काफी छोटी-छोटी बनाई गईं, ताकि अटल को ऊपर चढ़ने समय परेशानी न हो।

चौ. देवीलाल को हराने सोनीपत आए थे वाजपेयी

atal bihari vajpayee - फोटो : pti
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन होने से सोनीपत के लोगों को भी बड़ा झटका लगा है। क्योंकि यहां उनका कई बार आना हुआ है और लोगों के दिल में आज भी अटल वाजपेयी के साथ बिताए हुए उन पलों की यादें बसी है। सोनीपत के लोग अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए तीन दशक पहले भी कई-कई घंटे तक इंतजार करते थे और एक बार उनके देरी से आने के कारण आधी रात तक सभा स्थल पर डटे रहे थे।

वहीं, चौ. देवीलाल को हराने के लिए भी वाजपेयी सोनीपत में आए थे। अटल बिहारी वाजपेयी कई बार यहां चुनावी सभा करने आए हैं तो एक बार संघ शिक्षा वर्ग के प्रथम वर्ष शिविर में शामिल हुए थे। उस शिविर से वाजपेयी ने अपने सरल स्वभाव से अपनी एक अलग छाप हर किसी के मन में छोड़ी थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सोनीपत में सबसे पहले 1971 में मोरारजी देसाई के साथ कांग्रेस ओल्ड से चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री व एमपी स्व. रिजकराम के लिए सुभाष चौक पर चुनावी सभा करने आए थे।

उसके बाद 1982 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे देवीदास के लिए हिंदू कालेज के सामने सभा करने पहुंचे थे। उस समय भी अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए लोगों में कितना उत्साह होता था, इसका इसी बात से पता चलता है कि सभा का समय शाम 7 बजे रखा गया था। जिसके लिए लोगों की भीड़ पहले ही जमा हो गई थी, लेकिन वह किसी कारण से समय पर नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद लोग उनको सुनने के लिए जमा रहे और अटल बिहारी वाजपेयी रात में 11 बजे पहुंचे तो उसके बाद सभा शुरू हो सकी।

उनको सुनने के बाद ही लोग वहां से गए। इसके बाद सोनीपत में 1983 में लोकसभा के उप चुनाव हुए थे। क्योंकि स्व. चौ. देवीलाल ने उस समय लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था और इस सीट पर दोबारा चुनाव कराए गए थे। जिसमें चौ. देवीलाल के सामने किताब सिंह व विधायक जयतीर्थ के पिता रिजकराम प्रत्याशी थे। उस समय किताब सिंह मलिक के पक्ष में चुनावी सभा करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी मंडी में आए थे।

हालांकि किताब सिंह मलिक चुनाव नहीं जीत सके थे, लेकिन चौ. देवीलाल को भी हार का मुंह देखना पड़ा था और रिजकराम ने उस समय जीत दर्ज की थी। इनके बाद वर्ष 1991 में वह फिर से देवीदास के चुनाव में सभा को संबोधित करने के लिए सोनीपत की मंडी में पहुंचे थे। भाजपा जिला महामंत्री मनोज जैन, वरिष्ठ नेता हरिपाल शर्मा बताते हैं अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार चुनावी सभाओं के लिए यहां आए थे।

 

किसानों के सच्चे हितैषी थे अटल, किसान का ब्याज का बोझ कम करने का श्रेय भी उन्हें

atal bihari vajpayee
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सच्चे किसान हितैषी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में इसे चरितार्थ भी किया। हरियाणा के कृषि एवं पंचायत विकास मंत्री ओपी धनखड़ ने वाजपेयी जी के निधन को अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि वे एक युग दृष्टा राजनीतिज्ञ और सच्चे किसान हितैषी थे। भारत के किसान का ब्याज का बोझ कम करने का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है।

धनखड़ ने उनके साथ सांझा किए पलों को याद करते हुए कहा कि मुझे उनके प्रधानमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री निवास पर मंच संचालन का मौका मिला था, जिसे वे कभी भुला नहीं पाएंगे। वे उस वक्त पांच सौ किसानों सहित फसली ऋण का ब्याज पहली बार 18 प्रतिशत से 9 प्रतिशत करने पर उनका धन्यवाद करने पहुंचे थे। धनखड़ ने कहा कि वाजपेयी ने किसानों के लिये क्रेडिट कार्ड शुरू किया। वर्तमान फसल बीमा का विचार उनके युग में ही धरातल पर आया।

धनखड़ बताते हैं कि एक बार भाजपा कार्यालय अशोका रोड पर केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक हुई। उसमें वाजपेयी उपस्थित थे। पिछले दिन शाम को यूरिया का भाव पांच रुपये प्रति बैग बढ़ाया गया था। बैठक में वैंकेया नायडू ने पूछा, किसी ने कुछ और कहना है। तब मैंने कहा कि यूरिया के दाम बढ़े हैं, किसानों पर बोझ बढ़ गया। किसान इससे खुश नहीं हैं, बढे़ हुए दाम की वापसी चाहते हैं।

इसके बाद नायडू ने मुझे अपने कक्ष में बुलाकर डांटते हुए पूछा कि आपने ये विषय क्यों उठाया? मैंने सहजता से कहा आपने ही कहा, किसी ने कुछ तात्कालिक विषय पर कहना है तो कहें, तभी किसानों से जो जानकारी मिली वो कहा। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री को लगेगा मैंने तुम्हें कहने को कहा होगा। क्योंकि रास्ते में मैंने उनसे यही निवेदन किया था। खास बात यह रही कि उसी शाम को यूरिया के बढ़े भाव वापस हो गए।

सब रसों के वक्ता थे वाजपेयी

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धनखड़ ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में वैंकेया नायडू की अध्यक्षता में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य करने का मौका मिला। इसलिए उन्हें निकट से सुनने का कई बार अवसर प्राप्त हुआ। धनखड़ ने कहा कि मेरे अब तक के जीवन काल के वो सर्वश्रेष्ठ वक्ता थे, उनके भाषण मे कविता के समान ही सब रस होते थे। हर कविता एक नए अर्थ और भाव के साथ बांधती थी। हास्य,  करूण,  वीरता की उनकी कविताएं उललेखनीय हैं।

थाह नही पा सकते
धनखड़ ने कहा कि वाजपेयी की गहराई की थाह पाना संभव नहीं था। आप अपनी बात रख सकते थे, ध्यान से सुन लिया यही सबके लिए पर्याप्त था। हम हरियाणा भाजपा की टीम चौटाला से गठबंधन मे 35 सीटें मिले इसका तर्क लेकर प्रधानमंत्री निवास गए। रामबिलास शर्मा, मनोहर लाल व ओमप्रकाश ग्रोवर के साथ पक्ष रखने का दायित्व मुझ पर था । मैंने सब बातें विस्तार से उनकी सीट के साथ खड़े होकर रखीं, सब बातों को सुनने के बाद उन्होंने मेरी और देखा तथा बस इतना ही कहा कि बड़ी तैयारी से आए हो।

सत्य कभी एक तरफ़ा नहीं होता
उनकी सबसे बड़ी खूबी यही थी, वह जीवन के इस सत्य को बखूबी जानते थे, सत्य कभी एक तरफा नहीं होता। आप जो भी पक्ष रखते वो उसका दूसरा पक्ष सहजता से सामने रख देते थे। किस्सा तबका है जब चौटाला की सरकार बनी, हरियाणा भाजपा टीम, कुछ तकलीफें बताने प्रधानमंत्री कार्यालय गई। उन्होंने सहजता से कहा जिन राज्यों में  भजपा शासित सरकारें है, वहां के अन्य दल आप जैसी ही शिकायतें लेकर आते हैं। वाजपेयी में हंसते हुए सब कुछ कह देने का अनूठा कौशल था। बंसीलाल की सरकार से  समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री निवास पर मिलने गए। रामबिलास शर्मा ने समर्थन वापसी की जानकारी दी, उन्होंने हंसते हुए कहा गिरा तो सकते हो, पर अपनी चला भी सकते हो।

बस, अब हो गई छुट्टी
प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी से निवृत्त होने के बाद जब वाजपेयी प्रीणी, मनाली स्थित निवास पर थे तो जगत प्रकाश नड्डा, मनोहर लाल और मैं उनसे मिलने गए। वर्तमान सीएम मनोहर लाल ने कहा कि ऐसे छुट्टी के माहौल में पहली बार मिल रहे हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि बस, अब हो गई छुट्टी।

सुनो, चौधरी देवीलाल तेरा विधायक इमप्योर है और मेरा प्योर

अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : amar ujala
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हरियाणा के साथ अनेक संस्मरण जुड़े हुए हैं। वाजपेयी की हरियाणा में भाजपा को धरातल पर खड़ा करने और सत्ता में लाने में अहम भूमिका रही। वाजपेयी जब हरियाणा में पार्टी का काम देखते थे तो उनकी बेबाकी के विपक्षी दलों के नेता भी कायल थे। वह अपनी बात को सीधे शब्दों के साथ व्यंग्यात्मक लहजे में भी कहते थे। ऐसा ही किस्सा 1987 के विधानसभा चुनाव से भी जुड़ा हुआ है। वाजपेयी उस समय हरियाणा में पार्टी की कमान संभाले हुए थे।

इनेलो और भाजपा ने यह चुनाव मिलकर लड़ा। इससे पिछले चुनाव में भाजपा के कम विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, इसलिए चौधरी देवीलाल ने भाजपा को कम सीटें देने की पेशकश की। वाजपेयी ने जींद में चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को बैठक में संबोधित करते हुए बताया कि चौधरी देवीलाल, मुझसे कहते हैं कि पिछले चुनाव में भाजपा के कम  विधायक जीते थे, इसलिए आपकी पार्टी को कम सीट मिलेंगी। सुनकर टिकटार्थी बेचैन  हो गए। सीट कम मिलेंगी तो उनका नंबर कैसे आएगा।

वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने चौधरी देवीलाल को कह दिया कि सुन, चौधरी देवीलाल तेरा माल (विधायक ) इमप्योर है, और मेरा माल (विधायक ) प्योर  है। बेशक हमारे विधायक कम थे, लेकिन उन्होंने दलबदल नहीं किया। आपके विधायक पार्टी छोड़कर गए। एक आध  इमप्योर मॉल हमारी पार्टी में भी है, उनका इशारा उस विधायक की तरफ था जो उस समय के एक अन्य बड़े नेता के पे रोल पर था।

इसके बाद सीटों का बंटवारा मिलकर बैठकर दोनों दलों की इच्छा अनुसार हुआ। वाजपेयी ने महम कांड को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की थी, उन्होंने कहा था कि यह हमारे लोकतंत्र  के खूबसूरत चेहरे पर बदनुमा धब्बा है। यह सब बताया वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पवन बंसल ने।
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रामबिलास ने भेंट की एक लाख रुपये की थैली, वाजपेयी ने खुश होकर दी थी जीप

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में 1980 के दशक में भाजपा की जड़े जमाने का पूरा जिम्मा अटल बिहारी वाजपेयी पर था। इसी समय उनका ‘थैली भेंट’ कार्यक्रम चल रहा था। पार्टी की मजबूती के लिए वे लोगों से चंदा इकट्ठा कर रहे थे। 20 अक्टूबर 1980 में वाजपेयी ने एक साथ तीन रैलियां कीं। पहली रेवाड़ी के मोती चौक, दूसरी नारनौल की आईटीआई और तीसरी महेंद्रगढ़ शहर में। रेवाड़ी में रैली के संयोजक ओपी ग्रोवर और नारनौल रैली के संयोजक एडवोकेट मुकुट बिहारी ने 22-22 हजार रुपये की थैलियां वाजपेयी को दीं।

वहीं, रामबिलास शर्मा ने महेंद्रगढ़ से एक लाख रुपये की थैली वाजपेयी को भेंट की। रैली के बाद वाजपेयी ने रामबिलास के कार्यालय का भी दौरा किया। इसी दौरान रामबिलास ने वाजपेयी के पूछने पर बताया कि वे बाइक पर प्रचार करते हैं तो वाजपेयी उस समय कुछ नहीं बोले, तीन दिन बाद अपनी व्यक्तिगत जीप रामबिलास को भेज दी। अब रामबिलास शर्मा ने वाजपेयी की यादें संजोने का निर्णय लिया है। 38 साल पहले यूपी क्यू-2056 नंबर की जीप की वाजपेयी ने भेंट की थी।

शर्मा अब अपने लिए एक जीप खरीदने जा रहे हैं। जीप का नंबर यूपी क्यू-2056 होगा। बीते दिनों एम्स में भर्ती वाजपेयी से मुलाकात करने रामबिलास पहुंचे थे। वहां से लौटते ही उन्हें वाजपेयी की ओर से भेंट जीप याद आ गई। उन्होंने तुरंत रोहतक के डीसी यश गर्ग को फोन लगाया जीप के दस्तावेज ढूंढने को कहा। दरअसल, कलानौर-रोहतक रोड पर ही दशकों पहले आरटीए ने रामबिलास की जीप के कागज जब्त कर लिए थे। जीप तो कंडम हो गई, लेकिन ढूंढने पर अब उसकी आरसी मिल गई है।

रामबिलास ने वाजपेयी की यादों के तौर पर नई जीप खरीदने और वाजपेयी की जीप वाला नंबर ही लेने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि वे नंबर लेने के लिए कोई न कोई रास्ता निकालेंगे। उन्होंने कहा, यह जीप ऐसे समय पर मुझे दी गई थी, जब मैं मोटरसाइकिल पर संघ के प्रचारक के तौर पर काम करता था। याद रहे कि रामबिलास के पास बरसों तक झज्जर में संघ की कमान संभाल चुके हैं।
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