भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर
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ढींगरा आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर सौंपे गए हलफनामे पर पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने आक्रामक तेवर दिखाए और सरकार को घरा। हुड्डा ने हरियाणा सरकार कार्मिक विभाग के सचिव नितिन कुमार यादव द्वारा सौंपे गए हलफनामे पर अपनी लिखित प्रतिक्रिया हाईकोर्ट में सौंपते हुए कहा कि यादव ने आयोग के गठन की 14 मई बताई है और इसी दिन कैबिनेट से अप्रूव होने की बात कही है जबकि आयोग का गठन 13 मई को हुआ था।
ऐसे में हुड्डा ने सरकार के हलफनामे को झूठा और तथ्य विहीन करार दिया है। इससे पहले यादव ने हरियाणा सरकार की ओर से सीएम द्वारा आयोग केगठन के निर्णय का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं है कि कैबिनेट के सामने बिना कोई मैटीरियल रखे आयोग के गठन को केवल नोटिफिकेशन के माध्यम से मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री ने 13 मई 2015 को सीएलयू मामले की जांच के लिए आयोग के गठन का फैसला लिया था।
इन आदेशों की प्रति और आयोग के गठन के लिए मैटीरियल दोनों यादव के कार्यालय में 14 मई को प्राप्त हुए। इन सभी को काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के सामने पेश किया गया और कैबिनेट ने विचार करने के बाद इसे मंजूरी दे दी। इस पर हुड्डा ने अपनी लिखित प्रतिक्रिया में कहा कि यादव के हलफनामे से साफ है कि यह मंजूरी 14 मई को दी गई थी जबकि आयोग का गठन 13 मई को किया गया था। ऐसे में बिना कैबिनेट के सामने कोई मैटीरियल रखे आयोग का गठन किया गया है, याची की यह दलील सही है।