चंडीगढ़। यूटी पुलिस के वेतन विभाग में 1.1 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। मामले में विभाग प्रभारी जूनियर असिस्टेंट बलविंदर सिंह और उनके सहायक होमगार्ड सुरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिला अदालत में पेश कर क्राइम ब्रांच ने सुरजीत को एक दिन जबकि बलविंदर सिंह को तीन दिन के रिमांड पर लिया है। कर्मचारियों के खाते में अतिरिक्त रुपये डालकर आरोपी बाद में नगदी के रूप में वापस ले लेते थे। साढ़े तीन साल से यह घोटाला चल रहा था।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2013 में पुलिस विभाग के वेतन विभाग में बलविंदर सिंह प्रभारी के रूप में तैनात थे। वहीं, होमगार्ड सुरजीत सिंह उनके सहायक के रूप में तैनात थे। वर्ष 2019 में पुलिस को शिकायत मिली कि कर्मचारियों के खाते में अतिरिक्त रुपये डालकर घोटाला किया जा रहा था। दिसंबर 2019 में पुलिस ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की। इस दौरान शिकायत सही पाई गई। उसके बाद पुलिस ने कैग से ऑडिट जांच की मांग की। रिपोर्ट में पता चला कि साढ़े तीन साल में वेतन विभाग में घोटाला किया गया है। 25 फरवरी 2020 को पुलिस ने सेक्टर 3 थाने में धोखाधड़ी समेत कई अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया। उसके बाद केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
तीन साल में 161 कर्मचारियों के खाते में डाले अतिरिक्त रुपये
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों वर्ष 2016, 2017, 2018 और 2019 के मध्य तक 161 कर्मचारियों के खाते में अतिरिक्त रुपये डाले। इस दौरान कितने कर्मचारियों को आरोपियों ने लाभ पहुंचाया, इसकी जांच कराई जाएगी। मामले में कई अन्य लोगों का नाम सामने आने की भी आशंका है। 161 कर्मचारियों से भी अब पुलिस पूछताछ की तैयारी में है।
खेल समझने वाले को भी देते थे लालच
क्राइम ब्रांच की विशेष टीम को जांच में पता चला कि आरोपी अतिरिक्त रुपये डालकर कर्मचारियों को फोन कर रुपये वापस करने के लिए कहते थे। इस दौरान कुछ लोगों को दोनों का खेल समझ आ गया। जिन लोगों को मामले की जानकारी मिल जाती थी, उसे मेडिकल रिफंड, एरियर बढ़ाकर या अन्य तरीके से फायदा पहुंचा देते थे। वहीं कुछ लोग इस घोटाले से अनजान रहकर आरोपियों को रुपये वापस करते रहे।
एसआईटी की जांच में दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित हुए। इसके बाद दोनों की गिरफ्तारी हुई। मामले में अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। -मनोज कुमार मीणा, एपी, क्राइम ब्रांच