हालांकि नगर कीर्तन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा और सिख युवकों ने वाहेगुरु जी का खालसा, श्री वाहेगुरुजी के फतेह के जयकारे लगाकर इसे संपन्न कराया। 20 दिन पहले भी साउथ ऑकलैंड के उपनगर मनुरेवा में ब्रायन टमाकी समर्थकों ने हाका प्रदर्शन किया था तब पुलिस ने बीच-बचाव कर नगर कीर्तन को सुरक्षित निकाला था। वहीं, एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस विरोध की निंदा की। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय विश्वभर में भाईचारा, सेवा और शांति का संदेश देता रहा है और धार्मिक परंपराओं का विरोध न केवल अस्वीकार्य है बल्कि समाज में सौहार्द और सहअस्तित्व के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। धामी ने स्पष्ट किया कि दुनिया के किसी भी देश में रहने वाला सिख समुदाय स्थानीय कानूनों और संस्कृति का सम्मान करता है। इसके बावजूद सिखों को अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करने से रोकना निराशाजनक और अस्वीकार्य है।
भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील
एसजीपीसी प्रधान ने न्यूजीलैंड और भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हो सके।