ऐसा नगर निगम के इतिहास में पहली बार हुआ है जब सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव निर्विरोध हुआ हो। पार्टी की ओर से कोई निर्देश न होने के बावजूद कांग्रेस के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने के बाद राजनीति गलियारों में चर्चा हो गई है कि कहीं ये दोनों भविष्य में पाला न बदल लें।
लेकिन इन दोनों उम्मीदवारों का दावा है कि सिर्फ समय की बर्बादी से बचने के लिए नाम वापस लेना उनका खुद का निजी निर्णय है। जबकि पार्टी की ओर से उम्मीदवारों को ऐसा कोई निर्देश नहीं था।
कांग्रेस में भी ऐसा पहली बार हुआ है जब नेताओं की सहमति लिए बिना उम्मीदवारों ने अपने स्तर पर ही निर्णय लिया हो। पार्टी महासचिव दवेंद्र सिंह बबला का भी कहना है कि शीला फूल सिंह और रविंदर कौर गुजराल ने अपने स्तर पर ही नाम वापस लेने का निर्णय लिया है।
वोट बढ़ने की थी उम्मीद
सुबह 11:15 बजे मेयर चुनाव के लिए मतदान हुआ। कांग्रेस को तीन से चार वोट भाजपा से मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस को पार्टी के पार्षदों के 4 वोट ही मेयर चुनाव में मिले।
समय बचाने के लिए वापस लिया नाम
हमारे पार्षदों की संख्या सिर्फ 4 थी और मैं जीत नहीं सकती थी। मेयर चुनाव में भी गुरबख्श रावत को 4 ही वोट ही मिले। ऐसे में नाम वापस लेना ही ठीक था। मतदान होने से सिर्फ समय की ही बर्बादी होती, इसलिए नाम वापस लेना ही बेहतर समझा।-शीला फूल सिंह, कांग्रेस की सीनियर डिप्टी मेयर पद की उम्मीदवार
बबला ने पहले चेताया फिर कहा आशा की किरण
मेयर आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
नाम वापस लेना मेरा निजी निर्णय था। जीतने का आंकड़ा काफी दूर था, इसलिए समय बचाने के लिए नाम वापस ले लिया गया।- रविंदर कौर गुजराल, कांग्रेस की डिप्टी मेयर की उम्मीदवार
मुझे इस बारे में पता नहीं
पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल का कहना है कि वह दिल्ली में हैं और उन्हें उम्मीदवारों की ओर से मतदान से पहले नाम वापस लेने की जानकारी नहीं है। वह लौटकर कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा से इस बारे में बात करेंगे।
बबला ने पहले चेताया फिर कहा आशा की किरण
जब आशा जसवाल ने मेयर की कुर्सी संभाली तो कांग्रेस पार्षद दवेंद्र सिंह बबला ने उन्हें कहा कि अगर उन्होंने विपक्ष को नजर अंदाज किया तो उन्हें अपनी भूमिका निभानी भी आती है।
ऐसे में सभी पार्षदों का अधिकारी सम्मान करें, यह भी मेयर के हाथ में ही है। बबला ने कहा कि वह नहीं चाहते कि सदन राजनीति का अखाड़ा बने, हम सभी शहर का विकास चाहते हैं और उम्मीद है कि नवनियुक्त मेयर शहर के लिए आशा की किरण साबित होंगी।
जब बबला ने आशा की किरण बोला तो पार्षद भी हंस पड़े क्योंकि नवनियुक्त मेयर का नाम आशा है और सांसद का नाम किरण है। मेयर आशा जसवाल ने कहा कि उन्होंने अपने भाषण में डराने का भी प्रयास किया है लेकिन वह उसका भी स्वागत करते हैं। उन्होंने बबला को कहा कि वह सदन में सकरात्मक भूमिका निभाएं उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा।