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चंडीगढ़: एथलेटिक्स के बाद गोल्फ था मिल्खा सिंह का दूसरा प्यार, बेटे जीव ने इसी खेल में कमाया नाम

Sat, 19 Jun 2021 04:07 AM IST
ajay kumar संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

मिल्खा सिंह अपने बेटे जीव मिल्खा सिंह को एथलीट बनाना चाहते थे, इसके लिए वह उन्हें सेक्टर 7 एथलेटिक्स सेंटर भी लेकर जाते थे लेकिन उन्हें जल्द पता चला गया कि एथलेटिक्स में उनके बेटे की रुचि नहीं है तो वे जीव को अपने साथ चंडीगढ़ गोल्फ क्लब लेकर जाने लगे। वहां अपनी निगरानी में बचपन से ही कई कई घंटे अभ्यास कराते थे। पिता की मेहनत की बदौलत आज जीव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्फ खेल रहे हैं।
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जीव मिल्खा और मिल्खा सिंह। - फोटो : फाइल
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एथलेटिक्स के बाद गोल्फ मिल्खा सिंह का दूसरा प्यार था। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गोल्फ खेलकर अपना ज्यदातर समय बिताया। मिल्खा सिंह चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक थे। उनके साथ समय बिताने वाले गोल्फ के वरिष्ठ खिलाड़ी कहते हैं कि चंडीगढ़ गोल्फ क्लब ही उनका दूसरा घर था। वह यहां घंटों समय बिताते थे। न तो थकते थे और न ही जल्दी हार मानते थे। 

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गोल्फ में दिलचस्पी के चलते ही उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह आज अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोल्फर हैं। पौत्र हरजय मिल्खा सिंह भी रोजाना गोल्फ का अभ्यास करते हैं। वर्षों तक उनके साथ गोल्फ खेलने वाले दोस्तों से लेकर गोल्फ कोर्स के कैडी भी मिल्खा सिंह के मुरीद रहे।

‘अब दिल नहीं करता क्लब जाने का’
पिछले 12 वर्षों से मिल्खा सिंह के साथ रोजाना सुबह गोल्फ खेलने वाले उनके खास मित्र आलमगीर ग्रेवाल ने बताया कि अखबारों के जरिए उनके बीमार होने की सूचना मिली थी। गोल्फ कोर्स पर उनके साथ 5 घंटे खेलते हुए पता नहीं चलता था कि समय कैसे बीत गया। खेलते समय में वह हमेशा हंसी मजाक के साथ जीत का जज्बा लेकर आगे बढ़ते थे और सबको प्रोत्साहित करते थे। 

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पिछले साल लॉकडाउन खुलते ही उन्होंने फोन कर कहा कि आजा गोल्फ खेलते हैं। वे अक्सर कहते थे कि जिस दिन घर बैठ गया तो बीमार पड़ जाऊंगा। मैदान पर रहा तो कुछ नहीं होगा। आलमगीर ने बताया कि अब उनके बिना गोल्फ क्लब में जाकर खेलने का मन नहीं करता।

फाइटर थे मिल्खा सिंह
मिल्खा के साथ लगभग 20 वर्ष से गोल्फ खेलने वाल करीबी दोस्त रणदीप सिंह नाभा ने बताया कि खेलते वक्त वह थक जाते थे, लेकिन मिल्खा नहीं। जबकि वह 54 साल के हैं और मिल्ख 91 के। जब उनके बीमार होने की सूचना मिली तो फोन कर हाल पूछा था। तब उन्होंने अपने अंदाज में बताया कि कुछ नहीं होया मैंनू सब ठीक है। वे सही मायने में एक फाइटर थे। यारों के यार थे और गोल्फ के जबरदस्त शौकीन। वह इतने वर्षों में गोल्फ खेलने के लिए कभी देरी से क्लब नहीं पहुंचे।

भागकर एक से दूसरे होल तक पहुंच जाते थे
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के सबसे पुराने कैडियों में से एक अमृतसरिया ने बताया कि उन्होंने मिल्खा सिंह को साल 1984 से गोल्फ क्लब में खेलते देखा है। उनमें गजब की फुर्ती थी। शॉट लगाने के बाद कैडी पैदल चलकर दूसरे होल तक जाया करते थे, जबकि मिल्खा सिंह दौड़कर पहुंच जाते थे। पूरे 9 होल का कोर्स का फासला दौड़ते हुए तय करते थे। वे अक्सर कई कैडियों की आर्थिक मदद भी करते थे।
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