पिछले साल लॉकडाउन खुलते ही उन्होंने फोन कर कहा कि आजा गोल्फ खेलते हैं। वे अक्सर कहते थे कि जिस दिन घर बैठ गया तो बीमार पड़ जाऊंगा। मैदान पर रहा तो कुछ नहीं होगा। आलमगीर ने बताया कि अब उनके बिना गोल्फ क्लब में जाकर खेलने का मन नहीं करता।
फाइटर थे मिल्खा सिंह
मिल्खा के साथ लगभग 20 वर्ष से गोल्फ खेलने वाल करीबी दोस्त रणदीप सिंह नाभा ने बताया कि खेलते वक्त वह थक जाते थे, लेकिन मिल्खा नहीं। जबकि वह 54 साल के हैं और मिल्ख 91 के। जब उनके बीमार होने की सूचना मिली तो फोन कर हाल पूछा था। तब उन्होंने अपने अंदाज में बताया कि कुछ नहीं होया मैंनू सब ठीक है। वे सही मायने में एक फाइटर थे। यारों के यार थे और गोल्फ के जबरदस्त शौकीन। वह इतने वर्षों में गोल्फ खेलने के लिए कभी देरी से क्लब नहीं पहुंचे।
भागकर एक से दूसरे होल तक पहुंच जाते थे
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के सबसे पुराने कैडियों में से एक अमृतसरिया ने बताया कि उन्होंने मिल्खा सिंह को साल 1984 से गोल्फ क्लब में खेलते देखा है। उनमें गजब की फुर्ती थी। शॉट लगाने के बाद कैडी पैदल चलकर दूसरे होल तक जाया करते थे, जबकि मिल्खा सिंह दौड़कर पहुंच जाते थे। पूरे 9 होल का कोर्स का फासला दौड़ते हुए तय करते थे। वे अक्सर कई कैडियों की आर्थिक मदद भी करते थे।