बारिश के कारण हरियाणा में यमुना नदी रौद्र रूप में बह रही है। इसका जलस्तर आठ लाख 28 हजार क्यूसेक को भी पार कर गया है, जिससे दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रविवार को यमुना के जलस्तर ने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। सिंचाई विभाग की तरफ से यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं इन चारों जिलों में यमुना की जद में आने वाले रिहायशी इलाके खाली करने के आदेश जारी किए हैं।
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साथ ही दिल्ली सरकार को भी सूचना भिजवा दी है। 72 घंटे के भीतर पानी के इस खतरनाल लेवल से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में बाढ़ के आसार बन गए हैं। हथिनीकुंड बैराज बनने के बाद अब तक का सबसे ज्यादा पानी 17 जून 2013 को 8,06,464 क्यूसेक दर्ज किया गया था। जबकि पिछले साल साढ़े छह लाख क्यूसेक पानी आया था। 1872 में अंग्रेजों द्वारा बनाएं गए ताजेवाला हेडवर्क्स पर भी इतना ज्यादा पानी पहुंचने का कोई रिकार्ड नहीं है।
दिल्ली में पहुंच सकता है ज्यादा पानी
सिंचाई विभाग की यमुना जल सेवाएं प्रभाग के एक्सईएन हरिदेव कांबोज ने बताया कि यमुनानगर में सोमनदी और पथराला नदी भी उफान पर है। इसके अतिरिक्त हरियाणा और यूपी के कई बड़े बरसाती नाले यमुना में गिरते हैं। ऐसे में दिल्ली पहुंचने वाला पानी आठ लाख क्यूसेक से काफी ज्यादा हो सकता है। क्योंकि इन नदी नालों का जलस्तर भी खतरे के निशान से कई गुणा ज्यादा है। दिल्ली सरकार को इस बारे में सूचना भिजवा दी गई है।
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यमुनानगर में तबाही, 50 से ज्यादा गांव डूबे
शनिवार दोपहर से कैचमेंट इलाके में चल रही मूसलाधार बारिश से यमुना के अलावा पथराला, सोमनदी और अन्य बरसाती नाले ओवरफ्लो हो गए हैं। यमुनानगर जिले के 50 से ज्यादा गांव डूब गए हैं और दो दर्जन से ज्यादा सड़कें और कई पुल बह गए हैं। जिसके चलते इन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। यहां इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। यमुनानगर शहर में दो से चार फीट पानी खड़ा है।
यमुना से सटे लापरा गांव को खाली करवा लिया गया है। पौबारी गांव में यमुना का पानी घुस गया है और यहां करीब 400 लोग फंस गए हैं। लोगों ने छत पर पनाह ली है। वहीं यमुनापार डेरों में रहने वाले 150 से अधिक लोग पानी में फंसे हुए हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक पानी में फंसे लोगों को रेस्क्यू के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है।
बस और रेल सेवाएं प्रभावित
सड़कें बह जाने से यमुनानगर में रोडवेज ने ग्रामीण क्षेत्र के रूटों से बसें हटा ली हैं। वहीं यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर पटरियों पर पानी भर गया। दुसानी गांव के पास रेल पटरियां धंस गई। वहीं कलानौर और यमुनानगर के बीच तेज बारिश के कारण ओएचई टूट गई। जिससे सुबह साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक लगभग आठ घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह से प्रभावित रहा।
दोपहर को हाई अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन शाम तक जलस्तर आठ लाख क्यूसेक के खतरनाक लेवल पर पहुंच गया। यमुनानगर के साथ-साथ तीन अन्य जिलों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। यमुना की जद में आने वाले रिहायशी क्षेत्रों को खाली करवाने को कहा गया है। आमजन से अपील है कि वे यमुना नदी की तरफ ना जाएं।
- मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर
एनएच-73 पर आया मारकंडा का पानी, सैकड़ों पर वाहन फंसे
मारकंडा और बेगना नदी का जलस्तर रविवार रात को खतरे के निशान को पार कर गया। मरकंडा का पानी जगाधरी-अंबाला नेशनल मार्ग पर पहुंच गया। सड़क जलमग्न होने से पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट गए। पुलिस ने कई स्थानों से रूट डायवर्ट करने शुरू कर दिए।
रात 9 बजे तक सैकड़ों वाहन जाम में फंसे हुए थे। पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी थी। मारंकडा नदी का पानी गांव हेमा माजरा, ब्राह्मण माजरा और जफरपुर में भी घुस गया है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर है।
यमुना क्षेत्र के 22 गांवों में बंद रहेंगे स्कूल
करनाल। बाढ़ के मद्देनजर डीसी विनय प्रताप सिंह ने 19 अगस्त को यमुना क्षेत्र में पड़ने वाले 22 गांवों के स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
इंद्री, करनाल और घरौंडा में अलर्ट, कंट्रोल रूम स्थापित
रविवार दिनभर इंद्री, करनाल और घरौंडा खंड में यमुना नदी क्षेत्र में हजारों एकड़ में लगाई धान फसल जलमग्न हो गई है। यमुना बीच के टापू में यूपी के कुंडा घाट गांव के कुछ किसान और चरवाहे अपने पशुओं के साथ शाम तक फंसे नजर आए। प्रशासन ने कंट्रोल रूम स्थापित कर हेल्प लाइन नंबर जारी कर दिए हैं। यमुना के अंदर ट्यूबवेल और इंजन इत्यादि सामान पानी में समाहित हो चुके हैं। सिंचाई विभाग का अमला दिन-रात यमुना पर डट गया है। संवेदनशील जगहों पर जेसीबी, डंपर, मिट्टी के बैग और मशीनें खड़ी कर दी हैं।
कालाअंब से मारंकडा नदी में 35 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने से सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने शाहाबाद में कंट्रोल रूम बनाया है, जिससे किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके। इसके अलावा रविवार तड़के उपायुक्त ने शाहाबाद के कई गांवों का दौरा कर जमीनी तैयारियों की हकीकत भी जानी। वहीं, इलाके के गांवों में नदी के पानी बढ़ने के बाद से हड़कंप की स्थिति है। ग्रामीणों ने हजारों एकड़ फसल डूबने की आशंका जताई है।
सोनीपत 15 गांवों में मुनादी कराई, लोगों के नदी किनारे पर जाने को रोक
यमुना में बाढ़ के मद्देनजर 15 गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। प्रशासन ने गांवों में मुनादी कराने के साथ ही हाईअलर्ट जारी कर दिया है। लोगों के यमुना किनारे जाने पर रोक लगा दी गई है तो मनौली में बांध के अंदर बने मकानों को खाली कराया है। राजस्व विभाग के कर्मियों की ड्यूटी यमुना किनारे लगा दी गई है और ग्रामीणों को ठीकरी पहरा लगाने के लिए कहा गया है। जिले में बारिश के कारण रातभर ब्लैक आउट रहा। पेयजल के लिए 20 हजार से ज्यादा लोग तरस गए।