सोमवार को यूनियन का शिष्टमंडल बिजली वितरण निगमों के चेयरमैन से मिला था और सभी मुद्दे उनके समक्ष रखे थे। लेकिन, चेयरमैन यूनियन को संतुष्ट नही कर पाए। इसलिए यूनियन को आंदोलन छेड़ने का निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा है। तीन साल पहले भी गुरुग्राम में 7 सब डिवीजन का आपरेशन एवं मैंटीनेंस का काम निजी हाथों में दिया गया था, जो बुरी तरह विफल रहा। उसके बाद निगमों के कर्मचारियों ने ही बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चलाने का काम किया था।
सीएम के आदेश भी नहीं हुए लागू
यूनियन के चेयरमैन देवेंद्र हुड्डा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व उप प्रधान एनपी सिंह चौहान ने बताया कि बीते बीस जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की मीटिंग में एसए की नई भर्ती होने के बाद आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-2 के विरुद्ध ठेकेदारों के मार्फत लगे डीसी रेट अनुबंध कर्मियों को ठेकेदारों को बीच से हटाकर पार्ट दो में करने और पहले से सीधे निगमों के रोल पर लगे डीसी रेट अनुबंध कर्मियों को ठेकेदारों के मार्फत न करने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कहने के बावजूद कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। मुख्यमंत्री के कहने के बावजूद बिजली निगमों के पेंशनर्ज की पेंशन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार संशोधित नहीं की गई है। सरकार के लिखित आदेश के बावजूद डीसी रेट अनुबंध कर्मियों की 8-9 जनवरी 2019 की हड़ताल अवधि की छुट्टियां पास नहीं की जा रही। बार बार कहने के बावजूद सब स्टेशनों पर पुरानी यार्ड स्टीक के अनुसार सात कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर रहे।