पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेल ट्रैक पर पहली बार 1 फरवरी से एक्सप्रेस ट्रेन दौड़ेगी। उत्तर रेलवे ने 2 सफल ट्रायल के बाद ट्रेन चलाने को मंजूरी दे दी। ब्रॉडगेज के मुकाबले नैरोगेज ट्रैक पर चलने वारी एक्सप्रेस ट्रेन की गति 40 किमी. प्रति घंटा के आसपास रहेगी। इससे यात्रियों के 4 घंटे बचेंगे। अधिकारियों के मुताबिक पहले 164 किमी. लंबे रूट पर 8 से 9 घंटे का समय लगता था। नैरोगेज ट्रैक अब यह घटकर 5 घंटे 10 मिनट में पूरा हो सकेगा।
वहीं यह ट्रेन केवल 4 स्टॉपेज पर ही रुकेगी और हर स्टॉपेज पर केवल 2 मिनट ट्रेन का ठहराव होगा। केवल 4 कोच वाली इस ट्रेन में 40-40 सीट वाले 1 कुर्सी यान व द्वितीय कुर्सीयान और 2 सामान्य कोच होंगे। एक्सप्रेस ट्रेन का किराया अधिक होगा। कुर्सीयान में यात्रियों को साधारण से 8 गुना यानि पठानकोट-बैजनाथ पपरोला तक 30 की बजाए 260 रुपये और जनरल कोच में दो गुना यानि 60 रुपये खर्च करने होंगे। वहीं कुर्सीयान और सेकेंड क्लास कुर्सीयान कोच को आरक्षित रखा गया है। बैजनाथ से पहली ट्रेन चलेगी और 2 फरवरी से रूटीन में ट्रेन पठानकोट से चलेगी।
यह होगा नई ट्रेन का टाइम टेबल
52475 संख्या वाली एक्सप्रेस ट्रेन पठानकोट से सुबह 9.20 पर चलेगी व दोपहर 2.25 पर बैजनाथ पपरोला पहुंचेगी। रास्ते में 11.58 पर ज्वालामुखी रोड, 12.31 पर कांगड़ा, 1.03 मिनट पर नगरोटा, 1.40 पर पालमपुर में 2-2 मिनट के स्टॉपेज होंगे। वापस गाड़ी संख्या 52476 बैजनाथ पपरोला से शाम 4.30 बजे चलकर रात में 9.35 बजे पठानकोट पहुंचेगी।
1927 में अस्तित्व में आया था रेल सेक्शन
रिकार्ड के मुताबिक हिमाचल में हाइड्रोलिक पावर डैम के निर्माण कार्य में सामग्री पहुंचाने के लिए पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज ट्रैक का निर्माण कार्य 1927 में शुरू किया गया। दो वर्ष में ही अप्रैल 1929 में बिना मशीनों का प्रयोग किए सिर्फ मैनपावर से 164 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक का निर्माण पूरा कर लिया गया। जब तक डैम का काम चलता रहा, तब तक इस ट्रैक पर मालगाड़ी ही चलाई जाती रही। डैम बनने के बाद ट्रैक पर पैसेंजर गाड़ी को बैजनाथ तक स्टीम इंजन से चलाया गया। ट्रैक पर पैसेंजर गाड़ी चलने से पंजाब, हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर के लोगों को काफी राहत मिली। वर्ष 1972 में फिरोजपुर मंडल ने स्टीम इंजन बंद कर इस मार्ग पर डीजल इंजन से ट्रेनें शुरू की गईं।