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ग्राउंड रिपोर्ट: राय-सिख बिरादरी के इर्द-गिर्द घूम रही सियासत...नशा, बेरोजगारी और किसानी पर घिर रहीं पार्टियां

अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 25 May 2024 02:06 PM IST

सार

फिरोजपुर की फिजा इन दिनों पूरी तरह सियासी हो चुकी है। हम जैसे ही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए फिरोजपुर-फाजिल्का रोड पर गन्ने के जूस की रेहड़ी पर रुके वहां पर कई लोग खड़े राजनीति की ही बातें कर रहे थे। हाथ में जूस का गिलास लिए ममदोट के रमेश कुमार कहते हैं कि इस बार बदलाव की लहर लग रही है। वहीं, साथ खड़ी महिला जीतो बाई कहती हैं कि बस यात्रा मुफ्त होने से महिलाओं को काफी लाभ मिला है। खाईफेमी की निवासी जोगिंदर सिंह कहते हैं कि कोई भी जीते हमें तो मजदूरी करके ही रोटी खानी है।
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firozpur lok sabha election 2024 - फोटो : अमर उजाला
रोजपुर लोकसभा हलके का ज्यादातर इलाका पाकिस्तान की सीमा से सटा है। यह हलका सतलुज दरिया व नहरों से घिरा हुआ है। यहां पर पिछले लगभग 27 साल से शिरोमणि अकाली दल का कब्जा है। सुखबीर बादल ने शिरोमणि अकाली दल के गढ़ को बरकरार रखने के लिए स्वर्गीय सांसद जोरा सिंह मान के बेटे नरदेव सिंह मान को चुनाव मैदान में उतारा है। 

मान पर दो-दो जिम्मेदारी आ पड़ी है, एक तो पिता की खोई हुई सियासी पैठ को बनाए रखना है और दूसरा सीट पर पार्टी के कब्जे को बचाना है। कुछ दिनों में फिरोजपुर सीट के समीकरण बदले हैं, भाजपा के एक सीनियर नेता अपनी पार्टी से नाराज होकर आप में शामिल होने जा रहे हैं। 


अकाली-भाजपा गठबंधन टूटने से दोनों पार्टियों को नुकसान हो सकती है। यहां की सारी राजनीति राय सिख बिरादरी के इर्द-गिर्द घूम रही है। नशा, बेरोजगारी व किसानी जैसे मुद्दों पर लोग सभी पार्टियों को घेर रहे हैं। यहां मतदाताओं की संख्या 16,70,008 है। सबसे अधिक मतदाता राय सिख बिरादरी के हैं। 

इस बार शिअद, आप, बसपा, शिअद (अ) और भाजपा ने राय सिख बिरादरी के किसी भी व्यक्ति को टिकट देकर चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। इस बात का बिरादरी के लोगों ने विरोध भी किया है। सिर्फ कांग्रेस ने इस बिरादरी से संबंधित शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है। घुबाया अकाली दल से दो बार सांसद और दो बार विधायक भी रह चुके हैं। 
 
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firozpur lok sabha election 2024 - फोटो : अमर उजाला
रोजपुर लोकसभा हलके का ज्यादातर इलाका पाकिस्तान की सीमा से सटा है। यह हलका सतलुज दरिया व नहरों से घिरा हुआ है। यहां पर पिछले लगभग 27 साल से शिरोमणि अकाली दल का कब्जा है। सुखबीर बादल ने शिरोमणि अकाली दल के गढ़ को बरकरार रखने के लिए स्वर्गीय सांसद जोरा सिंह मान के बेटे नरदेव सिंह मान को चुनाव मैदान में उतारा है। 

मान पर दो-दो जिम्मेदारी आ पड़ी है, एक तो पिता की खोई हुई सियासी पैठ को बनाए रखना है और दूसरा सीट पर पार्टी के कब्जे को बचाना है। कुछ दिनों में फिरोजपुर सीट के समीकरण बदले हैं, भाजपा के एक सीनियर नेता अपनी पार्टी से नाराज होकर आप में शामिल होने जा रहे हैं। 

अकाली-भाजपा गठबंधन टूटने से दोनों पार्टियों को नुकसान हो सकती है। यहां की सारी राजनीति राय सिख बिरादरी के इर्द-गिर्द घूम रही है। नशा, बेरोजगारी व किसानी जैसे मुद्दों पर लोग सभी पार्टियों को घेर रहे हैं। यहां मतदाताओं की संख्या 16,70,008 है। सबसे अधिक मतदाता राय सिख बिरादरी के हैं। 

इस बार शिअद, आप, बसपा, शिअद (अ) और भाजपा ने राय सिख बिरादरी के किसी भी व्यक्ति को टिकट देकर चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। इस बात का बिरादरी के लोगों ने विरोध भी किया है। सिर्फ कांग्रेस ने इस बिरादरी से संबंधित शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है। घुबाया अकाली दल से दो बार सांसद और दो बार विधायक भी रह चुके हैं। 
 

लोग कहते हैं कि साल 2009 में अकाली दल ने जोरा सिंह मान की टिकट काट कर घुबाया को लोकसभा चुनाव में खड़ा किया था। इसी बात का गुस्सा जोरा सिंह के बेटे नरदेव सिंह मान को है। मान अपने पिता की खोई हुई सियासी जमीन पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। भाजपा ने यहां से कांग्रेस से आए राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है। 
 

इससे कई भाजपा नेता नाराज हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में फिरोजपुर के एक सीनियर भाजपा नेता सोढ़ी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले थे, लेकिन बाद में किसी कारण दोनों में मनमुटाव हो गया। अब सोढ़ी फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, तो उक्त नेता ने भाजपा छोड़ने का निर्णय बना लिया है। 

16 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे भाग्य का फैसला 
फिरोजपुर लोकसभा हलके में नौ विधानसभा हलके हैं, इनमें फिरोजपुर शहर, फिरोजपुर देहाती, गुरुहरसहाए, जलालाबाद, फाजिल्का, अबोहर, बल्लुआना, मुक्तसर व मलोट शामिल हैं। इनमें कुल 16,70,008 मतदाता हैं। हलके में राय सिख बिरादरी के लगभग चार लाख 75 हजार वोट हैं, जबकि कंबोज बिरादरी की तकरीबन साढ़े चार लाख वोट हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि राय सिख बिरादरी के वोट ही हार-जीत का फैसला करेंगे।
 

लोग बोले-रेल ट्रैक बिछा कर फिरोजपुर को अमृतसर से जोड़ा जाए
स्थानीय निवासी बलजीत सिंह व सतपाल सिंह का कहना है कि फिरोजपुर के सीमावर्ती गांवों के किसानों के नाम पक्की जमीन की जाए। बाढ़ में नष्ट हुई फसलों का मुआवजा दिया जाए। 
 

  • कृष्ण सिंह व गुरदेव सिंह कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बाॅर्डर स्थित शहीदी स्मारक का सौंदर्यीकरण कर टूरिज्म स्थल बनाया जाए। हुसैनीवाला बाॅर्डर को व्यापार के लिए खोला जाए। इसके अलावा पट्टी और मल्लांवाला के बीच रेल पटरी बिछा कर फिरोजपुर को अमृतसर के साथ जोड़ा जाए। इससे भी फिरोजपुर में रोजगार के साधन बढ़ेंगे।

  • फिरोजपुर शहर स्थित तूड़ी बाजार में बने शहीद -ए-आजम भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों के गुप्त ठिकाने को यादगार बनाया जाए। फिरोजपुर में कोई बड़ी फैक्ट्री स्थापित की जाए, ताकि पढ़े-लिखे नौजवानों को रोजगार मिल सके। फिरोजपुर से सीधी हरिद्वार के लिए ट्रेन चलाई जाए। हर साल आने वाली बाढ़ से फिरोजपुर के सीमावर्ती गांवों को बचाया जाए। 

  • सतलुज दरिया के पार ग्रामीणों की हजारों एकड़ जमीन है, लेकिन कई जगह पुल की सुविधा नहीं है, ग्रामीणों को नाव के माध्यम खेती के लिए जाना पड़ता है, कई बार नाव पलटने से लोगों की मौत हो चुकी है।

लगातार पांच बार जीता अकाली दल
  • वर्ष 1999 में शिरोमणि अकाली दल से जोरा सिंह मान सांसद बने। 
  • 2004 में फिर जोरा सिंह मान जीते। 
  • 2009 के चुनाव में शेर सिंह घुबाया ने बाजी मारी। 
  • 2014 में फिर से घुबाया ने जीत दोहराई। 
  • 2019 में अकाली दल से सुखबीर बादल सांसद बने। 
  • वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शिअद के प्रत्याशी शेर सिंह घुबाया ने कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील जाखड़ को 31,420 वोटों से पराजित किया था। 
  • वर्ष 2019 में शिअद प्रत्याशी सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस उम्मीदवार शेर सिंह घुबाया को 1,98,850 वोटों से हराया था।
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