राजमार्ग किनारे हरियाली में लगी आग।
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रोहतक-पानीपत राजमार्ग आग की लपटों से सुलग रहा है और यहां का प्रशासन आंख मूंद कर सो रहा है। आग की लपटों से बचते हुए वाहन चालक गाड़ियां निकाल रहे हैं। कुल मिलाकर आग की एक चिंगारी के कारण यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
यह आग दिल्ली से 45 किलोमीटर और गोहाना से 37 किलोमीटर दूर हाईवे पर ग्रीनबेल्ट (हरित क्षेत्र) में जगह-जगह लगी थी। इसे जानबूझकर लगाया गया या किसी कारण से लगी लेकिन इससे नुकसान बहुत हुआ। इसकी भेंट जहां वन संपदा चढ़ी, वहीं वायु प्रदूषण में भी इजाफा हुआ।
हरियाणा सरकार की सख्ती व किसानों को दी अनेक सहूलियतों का असर है कि इस बार प्रदेश में पराली बहुत कम जल रही है। रोहतक-बरोदा-गोहाना राजमार्ग पर खेतों में कहीं भी पराली जलती नहीं दिखी। किसान ट्रकों व ट्रैक्टर में पराली ले जा रहे थे।
उन्होंने पराली जलने से वायु प्रदूषण में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए पराली प्रबंधन की तरफ कदम बढ़ाए हैं। पराली प्रबंधन के लिए कई किलोमीटर दूर किसान ट्रालियों पर पराली लाद कर ले जाते हुए दिख जाएंगे। लेकिन हाइवे पर ग्रीनबेल्ट में लगी आग लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है।
रोकेंगे वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं : अमरिंदर कौर
प्र्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट (पीसीसीएफ) अमरिंदर कौर का कहना है कि वन क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं रोकी जाएंगी। हाईवे किनारे व जंगलों में आग कौन लगा रहा है, उस पर निगरानी रखने के निर्देश जिला वन अधिकारियों को जारी करेंगे। रंगे हाथ आग लगाते पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।