इस दौरान नगर निगम फायरकर्मी को भी सूचना दी। सूचना मिलते ही सेक्टर 11, 32 और सेक्टर 17 से तीन फायर टेंडर पीजीआई के लिए रवाना हुए। लेकिन जब तक वे पीजीआई पहुंचते, तब तक आग पर काबू पा लिया गया था। अच्छी बात यह रही कि आग से कोई हताहत नहीं हुआ है। लेकिन पांचवीं मंजिल के कॉरिडोर में धुंआ भर गया था। पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर कुमार गौरव धवन ने बताया कि आग को समय रहते काबू पा लिया गया है। आग से किसी को नुकसान नहीं पहुंचा है।
पांचवीं मंजिल के मरीजों को शिफ्ट किया गया
आग लगते ही पूरे कॉरिडोर में शोर मच गया। आग की लपटें बढ़ती देख सुरक्षाकर्मियों ने एहतियात के तौर प्राइवेट रूम और मेल सर्जिकल वार्ड के मरीजों को शिफ्ट चौथी और तीसरी मंजिल में शिफ्ट कर दिया। धुआं निकालने के लिए कॉरिडोर के शीशे तोड़ दिए। शिफ्ट किए गए मरीजों को करीब 45 मिनट के बाद वापस दोबारा वार्ड में लाया गया। हालांकि देर शाम कॉरिडोर में धुआं महसूस किया जा रहा था। इस दौरान मरीज के साथ आए अटेंडेंट ने धुएं से एलर्जी और आंख में जलन की शिकायत बताई।
ऐन वक्त पर सिलेंडर को बाहर किया
कैंटीन के किचन में चार से पांच सिलेंडर भी रखे थे। आग लगते ही कर्मियों ने किचन के शीशे तोड़कर बाहर फेंक दिए गए। जिस तरह से आग की लपटें निकल रही थीं, उस हिसाब से यदि आग सिलेंडर तक पहुंच जाती तो तबाही मचना तय थी। लेकिन कर्मियों ने सूझबूझ से काम लिया और सिलेंडर को बाहर फेंक दिया। किचन के सामने मेल सर्जिकल वार्ड है, जबकि कुछ दूरी पर प्राइवेट वार्ड के मरीज दाखिल होते हैं।