चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पैसे के लेनदेन का मामला यदि समझौते के आधार पर समाप्त हो गया हो तो उसमें भगोड़ा घोषित करने के बाद दर्ज एफआईआर कानून का दुरुपयोग है।
मोहाली के बिल्डर जरनैल सिंह बाजवा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसका दयाल सिंह के साथ फ्लैट बेचने का अनुबंध हुआ था। वह उसे संपत्ति पर कब्जा नहीं दे पाया था। अपने पैसे वापस पाने के लिए दयाल सिंह ने याची के खिलाफ शिकायत दी थी। याची ट्रायल में पेश नहीं हुआ तो उसे भगोड़ा घोषित कर एफआईआर दर्ज कर दी गई। याची ने बताया कि इस बीच उसका शिकायतकर्ता से समझौता हो गया और उसने अदालत से शिकायत वापस ले ली। शिकायत वापस लेने के बावजूद उसके खिलाफ भगोड़ा घोषित होने के चलते दर्ज एफआईआर अभी भी अस्तित्व में है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया अदालत में व्यक्ति की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए होती है। यदि मामले में जिसकी उपस्थिति सुनिश्चित करनी है, वह ही समाप्त हो गया तो भगोड़ा घोषित होने के चलते दर्ज एफआईआर कानून का दुरुपयोग है। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याची के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।