सूत्रों के अनुसार शहर में कोरोना का ग्राफ ऐसे ही बढ़ता रहा तो लॉकडाउन के दौरान की कुछ सख्ती फिर से शहर में लौट सकती हैं। इनमें कुछ मार्केट में ऑड-ईवन को फिर से लागू किया जा सकता है। कई राज्यों में संक्रमण की चपेट में स्कूलों के बच्चे और शिक्षक भी आने लगे हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकारों ने एक बार फिर से स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है।
इस मुद्दे पर मनोज परिदा का कहना है कि शहर के ज्यादातर स्कूलों में ऑनलाइन ही पढ़ाई हो रही है। स्कूलों में बहुत ही कम बच्चे पढ़ने के लिए पहुंच रहे हैं, इसलिए फिलहाल स्कूलों के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि प्रशासन ने दो जून को सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया था। बिना मास्क के घूमने पर 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया था।
चंडीगढ़ में बेकाबू हो गया था कोरोना, मांगनी पड़ी थी केंद्र से मदद
सितंबर के महीने में शहर में कोरोना बेकाबू हो गया था। केसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए थे। इसलिए प्रशासन चार सितंबर को शहर में कोरोना वायरस को रोकने के लिए केंद्र सरकार से एक मेडिकल एक्सपर्ट टीम की मदद मांगी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ प्रशासन के अधिकरियों की एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक हुई थी।
केंद्र सरकार के अधिकारियों ने पाया कि अगस्त महीने के बाद से शहर में कोविड के मामले तेजी से बढ़े। इस पर प्रशासन की तरफ से चंडीगढ़ को एक मेडिकल एक्सपर्ट टीम देने के लिए आग्रह किया गया। कुछ दिनों बाद केंद्र से 10 दिनों के लिए दो सदस्यीय टीम आई, जिसने सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। उस रिपोर्ट के अनुसार ही प्रशासन ने काम किया, जिसके बाद कोविड के मामले शहर में कम हुए थे।